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Saturday, September 4, 2021

मंदिर बनवाने से नर्क की प्राप्ति यदि....


मंदिर बनवाने से नर्क की प्राप्ति यदि....

https://www.youtube.com/watch?v=pXus7FpQ1uI&list=PLI9pJ1j5Go3tIR9SwkoTdcTm-EhrmGIM2&index=27 गीता से ज्ञान मिलेगा, सत्संग से 3 लाभ पहले भी बताए गए हैं (1) सत्संग के अंदर शंकाओं का समाधान होना चाहिए (your doubts should get cleared) (2) शंकाओं का समाधान से श्रद्धा (faith) और परिपक्व (solidify / strengthen) होनी चाहिए (3) जीवन में बदलाव आना चाहिए https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=32 जो ज्ञानी और श्रद्धा विहीन (without  faith ) व्यक्ति, जो शास्त्रों में संदेह (doubt) करते हैं, वे ईश्वर भावना अमृत प्राप्त नहीं करते, वे नीचे गिर जाते हैं, संशय (doubt) आत्मा के लिए ना तो इस लोक में, ना परलोक में सुख है, और आज लोग खूब संदेह करते हैं शास्त्रों में, simply because, क्योंकि वो शास्त्रों को पढ़ते ही नहीं है, खाली मंदिर जाने से काम नहीं बनता  https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=54  एक सेठ ने मुझे बताया की मैंने तीन मंदिर बनवाएं हैं तो मैंने कहा कि उनका ध्यान कौन रखेगा, यानी भगवान की श्रद्धापूर्वक सेवा कौन करेगा, जैसे आपने PM को बुला लिया और वो आ भी गए, अब आप इधर उधर डोल रहे हो कि बस PM को बुला लिया और काम खत्म - यदि आपने भगवान की स्वयं सेवा नहीं की तो कोई लाभ नहीं https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=90  हम सभी doubts  से भरपूर है शास्त्रों और भगवान के बारे में, मंदिर बनाना तो रजोगुण में होता है मगर मंदिर चलाने के लिए सतोगुण चाहिए https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=210 रावण को शिव में विश्वास था मगर शिव की आज्ञा में विश्वास नहीं था और शास्त्र का मतलब होता है शास्त्र की आज्ञा  https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=259  तो कई बार लोग कह देते हैं “मैं भगवान को मानता हूँ” -पर क्या सही में वो भगवान की आज्ञा का पालन करते हैं, यदि नहीं – तो ना मानने के बराबर है, बालक पिताजी से कहे मैं आपकी पूजा करता करूँगा, और पूजा करी भी मगर पिताजी की आज्ञा नहीं मानी, तो पूजा का क्या फायदा https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=278  हम सबने ही वेदिक धर्म का सत्यानाश कर दिया है, इसका कारण हम ही हैं, दूसरे पर उँगली मत उठाइए https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=322  मंदिर जाना अनिवार्य है, शास्त्रों के अनुसार, की रोज़ सुबह दर्शन करने चाहिए, भगवान श्रीकृष्ण के, श्री विष्णु के, मगर केवल मंदिर जाने मात्र से बात नहीं बनेगी, जब तक भगवान की आज्ञा का पालन नहीं करते, तब तक आप भक्त नहीं बन सकते https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=338  यदि आप भक्त नहीं बन पाए, मगर आरती तो आप ने गाई कि “भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे” मगर संकट तो दूर हुए नहीं, इसका मतलब भगवान में गड़बड़ नहीं है, गड़बड़ी ये है कि  आप असुर (demon, एक व्यक्ति या तो भक्त हो सकता है या असुर) हो  https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=364  यदि कोई भक्त कहे कि “मैं दुखी हूँ” तो सीधा तात्पर्य ये है कि वो भक्त है ही नहीं, क्योंकि भक्त कभी दुखी हो ही नहीं सकता https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=381  लोग दूसरे लोगों को खुश करना चाहते हैं बजाय की भगवान को, यदि जड़ को पानी दोगे तभी पेड़ संतुष्ट होगा केवल पत्तों में पानी डालने से नहीं  https://youtu.be/pXus7FpQ1uI&t=410