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Thursday, November 18, 2021

“श्री कृष्ण कृपा” से क्या संभव नहीं…फिर क्यों कहीं और देखें ! | Shree Hita Ambrish Ji

श्री कृष्ण कृपा” से क्या संभव नहीं…फिर क्यों कहीं और देखें ! | Shree Hita Ambrish Ji


1 तो चरण शरण केवल भगवान की, बस भक्ति केवल भगवान की, केवल प्रभु के चरणों का आश्रय हो मन में, इस बात का सुदृढ़ विश्वास हो पक्का भरोसा कि भाई हमारा कल्याण प्रभु के अतिरिक्त कोई नहीं करा सकता है अब जब कहीं से कुछ मिलने वाला ही नहीं है द्वार द्वार भटक क्यों रहे हो और फिर दूसरी बात,  संसार में कोई आपको दे रहा हो या किसी देवी देवता से आप ले रहे हो सब आपको दे तो प्रभु का ही दिया रहे हैं देने वाला तो एक है, यह बात भी संतों ने कही है, “दाता एक राम”, देने वाला तो एक है भाई, दूसरा कोई है ही नहीं, भगवान स्वयं कह रहे हैं “एको हम” द्वितीयो नास्ती” दूसरा कोई नहीं है  https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=0 2 पर कोई बड़भागी होता है, कोई विरला होता है जो इस सार को, इस सत्य को जान पाता है, जिसके लिए भगवान ने गीता में कहा है, “वासुदेव सर्वम इति, स: महात्मा दुर्लभ:”  https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=47 3 ध्यान रखना कहीं भी कोई आशीर्वाद फलीभूत हो रहा हो, कहीं भी कोई मनोकामना पूरी हो रही हो, कहीं से भी आपको कुछ मिल रहा हो पर देखना मूल में देने वाले तो प्रभु ही हैं, जब सब दे ही प्रभु रहे हैं फिर भाई यहां वहां से क्यों लेना है, सीधे प्रभु से ही क्यों नहीं जाकर कहें  https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=62 4 और बड़े आनंद की बात है कि जिसको यह विश्वास हो जाए कि भाई वो एक ही तो है, वही बनाने वाला भी है, वही चलाने वाला भी है, वो यह भी जान जाएगा “बिन बोलेया सब कुछ जानदा, किस आगे कीजे अरदास” https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=79 5 इसलिए संतों ने तो एक भाव में विश्राम पाया है, एक भाव में प्रार्थना की है, विनती की है, याचना की है और बार-बार की है, “बार-बार वर मांगे हूं” कि सतत प्रार्थना में रत रहें, हमारी ऐसी मती दीजीये, मेरे ठाकुर “सदा सदा तुध ध्यान करूँ”, तुम करो दया मेरे साईं, तुम करो https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=127 6 “अनुग्रह भगवत: कृष्णस: भुत कर्मण:” यानी जो कोई नहीं कर सकता वो श्री कृष्ण कर सकते हैं और अपने भक्तों के लिए सहज में कर देते हैं, ऐसे ऐसे अद्भुत कर्म, ऐसी ऐसी अद्भुत लीलाएं भगवान अपने भक्तों के लि सहज में कर देते हैं, सूर्य भगवान ने अपने अपने रथ की गति एक बार रोक दी, श्री कृष्ण के संकेत पर यानी श्री कृष्ण की आज्ञा पाकर, और वहां ब्रज की लीला में जब रास रस का वर्षण कर रहे हैं रास बिहारी, तब भी तो सूर्य चंद्रमा चकित थकित होकर रुक गए थे, ये सारी भगवान की अद्भुत लीलाएं संकेत करती है, काल को, प्रकृति को आज्ञा देने वाले सर्वेश्वर सर्वाधार भी श्री कृष्ण ही हैं, श्री कृष्ण ही हैं, श्री कृष्ण ही हैं  https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=185 7 इसलिए सूरदास कहते हैं डंके की चोट पर “सब तज भजिए नंद कुमार”  https://www.youtube.com/watch?v=KhWFbRgL0RY&t=256

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