Sunday, March 26, 2023

हम अगले जन्म में क्या बनेंगे ? Bhagavad Gita Part 31 (Shlok 9.25-26) by Swami Mukundanand

हम अगले जन्म में क्या बनेंगे ? Bhagavad Gita Part 31 (Shlok 9.25-26) by Swami Mukundanand

 

https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc

Full Text  1  9.25 वां श्लोक तो अब श्री कृष्ण बड़ी simple theory बताते हैं इतना simple वे कहते हैं, अर्जुन, जिसकी भक्ति करेगा, जिसमें मन को लगाएगा, मरने के बाद उसी को प्राप्त करेगा, इतना simple, जैसे train है, जहां engine जाएगा, डब्बे भी वहां पर चले जाएंगें,  अगर हम मन को भगवान में लगाएंगे, मरने के बाद उनके लोक जाएंगे, अगर हम स्वर्ग के देवी देवताओं में लगाएंगे, मरने के बाद हम स्वर्ग जाएंगे, पुण्य क्षीण होने पर वहां से लौटेंगे, अगर हम मन को मनुष्यों में लगायेगें, तो वापस मृत्यु लोक में आएंगे और अगर भूत प्रेत की आराधना करेंगे, जैसे कुछ तांत्रिक आदि करते हैं, तो मरने के बाद हम भी भूत प्रेत की योनि में चले जाएंगे, इतनी simple philosophy अब हम decide कर ले हमको चाहिए क्या  https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc&t=74  2  एक बाप के बेटियां थीं, तो एक का विवाह उसने एक शराबी से किया, वह बेचारा शराब में सब गंवा के भिखारी बन गया, उसकी पत्नी की उपाधि पड़ी भिखारिन,  दूसरी लड़की का विवाह graduate से किया, वह कहीं पर clerk बाबू बन गया तो पत्नी का नाम पड़ा बबुआइन,  तीसरी का विवाह जो हुआ, वो बड़े brilliant लड़के से हुआ, वो IAS में आके Collector बना तो उसकी पत्नी की उपाधि मिली मेम साहब,  अब वो लड़कियां झगड़ा करती हैं, पिताजी, ये क्या हम सब आपकी बेटियां हैं मगर मेरी बहने एक बबुआन है, एक मेम साहिब है, और मैं भिखारिन हूं, ये मामला क्या है ? अरे बेटी, वो ऐसा ही है, भाग्य में जैसा था, जिससे विवाह हुआ, बस उसी की सामग्री मिल गई, तो यह सब विभिन्न सामग्रियां है विभिन्न लोग, विभिन्न persons, personalities  https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc&t=174  3  तो श्री कृष्ण fundamental clear कर रहे हैं, देख अर्जुन, इतनी सी बात है, अगर तू चाहता है, भगवत प्राप्ति करना, तो फिर याद रख, तुझे मन का लगाव, भगवान में ही करना होगा  https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc&t=253  4  9.26 वा श्लोक “verse” तो भगवान की भक्ति कैसे करें कहते हैं ? किसी भी प्रकार से, चिंता ही मत करो, तुम्हारे पास पैसा नहीं है, to एक फूल ले लो और वह फूल मुझे अर्पित कर दो,  कोई फूल नहीं दिख रहा, फल तो होगा, फल लेकर अर्पित कर दो, फल भी सब सूख गए हैं सड़ गए हैं, अरे पत्ता ही दे दो, पत्ते भी झड़ गए हैं, चिंता मत करो, “तोयम”, यानी जल तो होगा, जल अर्पित कर दो,  अगर तुम भक्ति के साथ करोगे, श्री कृष्ण कहते हैं, मैं स्वीकार करूंगा क्यों, इसलिए क्योंकि मैं तुम्हारा उपहार नहीं देखता, तुम्हारे भाव को देखता हूं, भगवान “भाव ग्राही जनार्दन” हैं, भगवान को वस्तु से मतलब नहीं है, उनको हमारे भाव से मतलब है,  क्योंकि उनको किसी चीज की आवश्यकता ही नहीं है, वे तो सर्वशक्तिमान हैं, सर्व समर्थ हैं, आत्माराम हैं, पूर्ण काम हैं, परम निष्काम हैं, निर् ग्रंथ हैं, ऐसी Supreme Personality of Godhead को हम क्या दे सकते हैं ?  https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc&t=268  5  तो भगवान की, यह जीव भला सेवा कर ही कैसे सकता है ? जीव तो अल्पज्ञ है, अशक्त है, जबकि भगवान सर्वज्ञ हैं और सशक्त हैं, तो क्या एक बच्चा, नवजात शिशु, मां की सेवा करता है ? नहीं , मां बच्चे की सेवा करती है,  इसलिए श्री कृष्ण ने कहा, “ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्” “As all surrender unto Me, I reward them accordingly. Everyone follows My path in all respects, O son of Pṛthā”.  https://vedabase.io/en/library/bg/4/11/  जीव को तो शरणागत होना है और यह भजन मैं करूंगा, भजन माने सेवा, मैं सेवा करूंगा,  जीव को तो बस मुझे शरणागत होना है, श्री कृष्ण कह रहे हैं कि अर्जुन, भगवान को तुम पत्र, पुष्प, फल, फूल, जल कुछ भी दो, अगर प्रेम से दोगे, तो स्वीकार करेंगे  लेकिन वह प्रेम का स्वरूप ऐसा है कि उसमें देने देने की भावना निहित होती हो, तो भगवान जानबूझ के जीव से देना देना कराते, वे कहते हैं जीव तुम मेरे लिए कुछ करो  https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc&t=382  6  अब जीव बेचारा वो सोचता है, भाई मैं तो भिखारी हूं, मैं क्या करूं भगवान के लिए ? वह (भगवान) करें मेरे लिए, इसलिए स्कंद पुराण कहता है, Verse, तुम ने जो न्याय पूर्वक कमाया है, उसका दसवां अंश भगवान को दे दो, भगवान कोई कंजूस नहीं हैं, वह अनंत गुणा करके तुमको लौटा देंगे,  लेकिन तुम्हारे स्वयं के कल्याण के लिए तुमको देना देना सीखना होगा और वो यथा शक्ति होगा (as per your individual capacity), पत्र, पुष्प, फल, फूल सबको श्री कृष्ण कह रहे हैं यहां पर वे स्वीकार करेंगे  https://www.youtube.com/watch?v=__StZQuasQc&t=455 

Transcript

1:14 9.25 वा श्लोक  तो अब श्री कृष्ण बड़ी सिंपल थ्योरी 1:40 बताते हैं इतना 1:43 सिंपल वे कहते हैं अर्जुन जिसकी भक्ति करेगा 1:48 जिसमें मन को लगाएगा उसी को प्राप्त करेगा 1:53 मरने के बाद इतना सिंपल जैसे ट्रेन है ना 1:58 जहां engine जाएगा डब्बे भी वहां पर चले 2:03 जाएंगें  अगर हम मन को भगवान में 2:08 लगाएंगे मरने के बाद  उनके लोक 2:14 जाएंगे अगर हम स्वर्ग के देवी देवताओं में 2:19 लगाएंगे मरने के बाद हम स्वर्ग जाएंगे 2:23 पुण्य क्षीण होने पर वहां से लौटेंगे अगर 2:27 हम मन को मनुष्यों में लगायेगें  2:31 तो वापस मृत्यु लोक में 2:34 आएंगे और अगर भूत प्रेत की आराधना करेंगे 2:39 जैसे कुछ तांत्रिक आदि करते हैं तो मरने 2:43 के बाद हम भी भूत प्रेत की योनि में चले 2:46 जाएंगे इतनी सिंपल फिलोसोफी अब हम डिसाइड 2:51 कर ले हमको चाहिए  2:54 क्या एक बाप के बेटियां थीं 3:00 तो एक का विवाह उसने एक शराबी से 3:05 किया वह बेचारा शराब में सब गंवा के भिखारी 3:10 बन गया उसकी पत्नी की उपाधि पड़ी भिखारिन 3:15 दूसरी लड़की का विवाह ग्रेजुएट से तो किया 3:18 वह कहीं पर क्लर्क बाबू बन गया तो पत्नी 3:22 का नाम पड़ा बबुआइन तीसरी का विवाह जो 3:27 हुआ वो बड़े ब्रिलियंट लड़के से हुआ वो 3:32 आईएएस में आके कलेक्टर बना तो उसकी पत्नी 3:36 की उपाधि मिली मेम साहब अब वो लड़कियां 3:41 झगड़ा करती हैं पिताजी ये क्या हम सब आपकी 3:46 बेटियां मेरी बहने एक बबुआन है एक मेम 3:50 साहिब है और मैं भिखारिन हूं ये मामला 3:54 क्या 3:54 है अरे बेटी वो ऐसा ही है भाग्य में जैसा 3:59 था जिससे विवाह हुआ बस उसी की सामग्री मिल 4:06 गई तो यह सब विभिन्न सामग्रियां है 4:10 विभिन्न पर्सनालिटी  4:13 तो श्री 4:15 कृष्ण फंडामेंटल क्लियर कर रहे हैं देख 4:19 अर्जुन इतनी सी बात अगर तू चाहता है भगवत 4:23 प्राप्ति करना तो फिर याद रख तुझे मन का 4:28 लगाव भगवान में ही करना होगा 26 वा 4:33 श्लोक “verse” 4:51 तो भगवान की भक्ति कैसे करें कहते हैं 4:56 किसी भी प्रकार से चिंता ही मत करो 5:01 तुम्हारे 5:02 पास पैसा नहीं 5:05 है एक फूल ले लो और वह फूल मुझे अर्पित कर 5:10 दो कोई फूल नहीं दिख रहा फल तो होगा फल 5:16 लेकर अर्पित कर 5:19 दो फल भी सब सूख गए हैं सड़ गए हैं अरे 5:24 पत्ता ही दे 5:26 दो पत्ते भी झड़ गए हैं 5:30 चिंता मत करो तोयं जल तो होगा ना जल 5:34 अर्पित कर दो अगर तुम भक्ति के साथ करोगे 5:40 श्री कृष्ण कहते हैं मैं स्वीकार करूंगा 5:44 क्यों इसलिए क्योंकि मैं तुम्हारा उपहार 5:48 नहीं 5:49 देखता तुम्हारे भाव को देखता हूं “भाव 5:54 ग्राही जनार्दन” भगवान को इससे मतलब नहीं 5:59 है 6:00 उनको हमारे भाव से मतलब है क्योंकि उनको 6:04 किसी चीज की आवश्यकता ही नहीं है वे तो 6:08 सर्वशक्तिमान हैं  सर्व समर्थ हैं  आत्माराम 6:12 हैं  पूर्ण काम हैं  परम निष्काम हैं  निर् 6:15 ग्रंथ 6:17 हैं ऐसी पर्सनालिटी को हम क्या दे सकते हैं  6:22 तो भगवान की यह जीव भला सेवा कर ही कैसे 6:27 सकता है  6:29 जीव तो अल्पज्ञ है अशक्त है भगवान सर्वज्ञ 6:33 है और सशक्त है तो क्या बच्चा नवजात शिशु 6:41 मां की सेवा 6:43 करता है ?  मां बच्चे की सेवा 6:46 करती है इसलिए श्री कृष्ण ने कहा ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्  As all surrender unto Me, I reward them accordingly. Everyone follows My path in all respects, O son of Pṛthā. https://vedabase.io/en/library/bg/4/11/ जीव को तो शरणागत होना है और यह भजन मैं 6:57 करूंगा भजन माने सेवा मैं सेवा करूंगा जीव 7:02 को शरणागत होना है तो श्री कृष्ण  7:06 कह रहे हैं कि अर्जुन भगवान को तुम पत्र 7:10 पुष्प फल फूल कुछ भी दो अगर प्रेम से दोगे 7:14 तो स्वीकार करेंगे लेकिन वह प्रेम का 7:18 स्वरूप ऐसा है कि उसमें देने देने की 7:22 भावना निहित होती तो भगवान जानबूझ के जीव 7:28 से 7:30 देना देना 7:31 कराते वे कहते हैं जीव तुम हमारे लिए कुछ 7:35 करो अब जीव बेचारा वो सोचता है भाई मैं तो 7:39 भिखारी हूं मैं क्या करूं भगवान के लिए वह (भगवान) 7:42 करें मेरे लिए इसलिए स्कंद पुराण कहता है 7:49 Verse  तुम ने जो 8:00 न्याय पूर्वक कमाया है उसका दसवां अंश भगवान 8:04 को दे दो भगवान  8:08 कोई कंजूस नहीं हैं वह अनंत गुणा करके 8:12 तुमको लौटा देंगे लेकिन तुम्हारे कल्याण 8:16 के लिए तुमको देना देना सीखना होगा और वो 8:22 यथा शक्ति होगा पत्र पुष्प फल फूल सबको 8:27 श्री कृष्ण कह रहे हैं यहां पर वे स्वीकार 8:30 करेंगे 

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What is True Love For God? | Service to God by Swami Mukundanand

What is True Love For God? | Service to God by Swami Mukundanand

https://www.youtube.com/watch?v=MRDloyulDdc
Full Text  1  Service is the expression of love, we need to understand, we have to develop our loving relationship with God, loving relationship is different from worldly loving relationship, you see there's a difference, in the world also the word love is used but the distinction is between lust and love.  What exists in the world is lust in the name of love, what we need to cultivate is love which is as different from lust as light is different from darkness “verse”. Chaitanya Charitamrita says it is like darkness and light, we have to reach that stage of inner growth where we truly love God and that love means not to take take take but to give give give - that is the one lesson we have never learned in endless lifetimes  https://www.youtube.com/watch?v=MRDloyulDdc&t=4  2  we wish God to get from him and love is the reverse of this - it is about giving to Him. How many times have we really given of ourselves ? you know once, one dollar note and 100 dollar note were getting scrapped, they were going back to the Reserve Bank, whatever it is called in USA, so the hundred dollar note said what a wonderful life it has been, I have been to so many places exquisite,  the one dollar note said what places have you been, I have had a very dreary (not at all interesting or attractive; boring) life. One hundred dollar note said, I am into Las Vegas and I went to Atlantic City and I went to the Sea World and I went to the casinos. $100 note said where did you go ?  One dollar note said, I went to the Ganesh mandir arti thali, then I went to the Vishnu temple arti thali, then I went to the Ram mandir arti thali then I went to Swami ji’s arti thali, the 100 dollar note said what place mandir are you talking about ? I've never seen a mandir.  https://www.youtube.com/watch?v=MRDloyulDdc&t=106  3  Have we ever learned to give in many ways ? you see, the Indian culture is studded with so many wonderful things but in one thing it falls way behind the rest of the world & that is when it comes to giving  https://www.youtube.com/watch?v=MRDloyulDdc&t=212  4  one beggar used to go around, then he met a businessman and the businessman asked him, why do you beg ? the beggar said sir, I tried for a job but I did not get it, so I have started begging, if you give me a job, I will stop begging.  The businessman said, I will do far more than that, I'll make you my business partner, he said really ? what is the deal ? the businessman said, look, I have got a rice field and I've got an empty shop in the market, I will supply you the rice, you only have to stand at the counter and sell it, really ? we will share the profits at the end. So how much will I keep will I keep 5% and give you 95 or will I keep 10% and give you 90% ? The businessman said, no you keep 90% of the profits and just give me 10%, the beggar said really ? his words failed him.  Now he actually meant it, he started giving and the beggar became a shopkeeper, he started selling things, at the end of the month, he got the profit now he thought I have done the work why should I give it to my business partner? I should keep it all to myself.  The businessman came and said give me my 10%, the beggar said, what 10 percent ? I have worked hard, it is all mine.  https://www.youtube.com/watch?v=MRDloyulDdc&t=226  5  in the same way, God gives us the body, He gives us the brain, He gives us the talents, He gives us the skills, He says go do it but out of whatever you earn, you take out 10% and you give it to Me in return, think about it. How much did we earn in our life ? have we even given back one percent in the service of God ?  we have to go a long way to understand what it means to love & when we understand that and develop the service attitude towards God, everything will fall in place, we will develop the service attitude in our relationships as well, we will understand relationships are not about my happiness, they are about giving & about helping others  https://www.youtube.com/watch?v=MRDloyulDdc&t=344  Transcript 0:04 service is the expression of love, we need to understand, we have to develop 0:14 our loving relationship with God, loving relationship is different from worldly 0:22 loving relationship, you see there's a difference, in the world also the word 0:30 love is used but the distinction is between lust and love what exists in the 0:38 world is lust in the name of love what we need to cultivate is love which is as 0:47 different from lust as light is different from darkness “verse” chaitanya 1:15 charitamrita says it is like darkness and light we have to reach that stage of 1:22 inner growth where we truly love God and that love means what not to take take 1:35 take but to give give give that is the one lesson we have never learned in 1:46 endless lifetimes we wish God to get from him and love is the reverse of this 1:57 it is about giving to him how many times have we really given of ourselves you 2:09 know once 2:11 one dollar note and $100 dollar note were getting scrapped they were going back to 2:22 the Reserve Bank whatever it is called in USA so the hundred dollar note said 2:30 what a wonderful life it has been I have been to so many places exquisite the one 2:39 dollar note said what places have you been - I have had a very dreary life one 2:46 hundred dollar note said I am into Las Vegas and I went to Atlantic City and I 2:52 went to the Sea World and I went to the casinos the $1 note said what places are 3:00 you talking about $100 note said where did you go I went to the Ganesh mandir arti thali 3:07 then I went to the Vishnu temple arti thali, then I went to the Ram mandir arti thali then I went to Swami ji’s arti thali  the hundred dollar note said what place mandir are you talking about I've 3:25 never seen a mandir  3:32 have we ever learned to give in many ways you see the Indian culture is 3:40 studded with so many wonderful things but in one thing it falls way behind the 3:46 rest of the world when it comes to giving one beggar used to go around then 3:56 he met a businessman and the businessman asked him why do you beg the beggar said 4:05 sir I tried for a job I did not get it so I have started begging if you give me 4:12 a job I will stop begging the businessman said I will do far more than that I'll 4:20 make you my business partner he said really the beggar said yes what 4:29 is the deal the businessman said look I have got a rice field and I've got an 4:36 empty shop in the market I will supply you the rice you only have to stand at 4:42 the counter and sell it really we will share the profits at the end so how 4:53 much will I keep will I keep 5% and give you 95 or will I keep 10% and give you 4:59 90% the businessman said no you keep 90% of the profits and just give me 5:07 10% the beggar said really his words failed him now he actually 5:16 meant it he started giving and the beggar became a shopkeeper he started 5:23 selling things at the end of the month he got the profit now he thought I have 5:31 done the work why should I give it to my business partner I should keep it 5:37 all to myself the businessman came and said give me my 10% the beggar said what 5:44 10 percent I have worked hard it is all mine in the same way God gives us the 5:51 body he gives us the brain he gives us the talents he gives us the skills he 5:58 says go do it but what do you earn you take out 10% and you give it to me in 6:06 return think about it 6:09 how much did we earn in our life have we even given back one percent in the 6:15 service of God we have to go a long way to understand what it means to love 6:26 & when we understand that and develop the service attitude towards God everything will 6:33 fall in place we will develop the service attitude in our relationships as 6:41 well we will understand relationships are not about my happiness they are 6:49 about giving about helping others

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