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Wednesday, August 5, 2026

पति के जीवन में पत्नी बनकर कौन आता है जानिए शास्त्रों का गूढ़ रहस्य by Rajender Das ji

पति के जीवन में पत्नी बनकर कौन आता है जानिए शास्त्रों का गूढ़ रहस्य

by Rajender Das ji

[00:00] उत्तम का विवाह बहुला के साथ हुआ था और जो उनकी पत्नी बहुला थी वह बड़ी रूपवती थी। वो उसमें आसक्त रहते थे, उनका मन और किसी काम में नहीं लगता था। स्वप्न में भी वह बहुला का ही चिंतन करते थे। रानी उनके अनुसार नहीं चलती थी पर वे रानी के अनुसार ही सदा चलते थे। वो कहे खड़े हो जाओ तो खड़े हो जाते, बैठ जाओ तो बैठ जाते। इस तरह से एकदम उसके अधीन होकर चलते थे। पर इतना प्रयास करने के बाद भी वह रानी बहुला कभी उनके अनुकूल नहीं होती।

[00:52] एक दिन राजा उत्तम अनेक राजाओं के साथ बैठे थे और उन राजाओं के समक्ष ही रानी ने महाराज का अपमान कर दिया, उनकी आज्ञा को ठुकरा दिया। इससे राजा को क्रोध आ गया। उन्होंने सोचा कि इतने लोगों के बीच में मेरी मर्यादा नहीं रखी और मेरी बेइज्जती कर दी। [01:25] राजाओं को विदा करने के बाद उन्होंने द्वारपालों को आज्ञा दी कि इस दुष्ट हृदया स्त्री को तुरंत रथ में बिठाओ और घनघोर जंगल में छोड़ आओ। सेवक ने रानी को निर्जन जंगल में छोड़ दिया और राजा अपनी प्रजा का पुत्रों के समान पालन करने लगे। [02:14] एक दिन राजा उत्तम के दरबार में एक दुखी ब्राह्मण आया और बोला, "महाराज! मेरी स्त्री को रात में बिना दरवाजा खुले कोई चुरा ले गया। आप मेरी स्त्री को खोजकर प्रदान करें, क्योंकि राजा आय और धर्म दोनों का छठा भाग लेता है।"

[03:45] राजा ने ब्राह्मण से स्त्री का हुलिया पूछा। ब्राह्मण ने बताया कि उसकी दृष्टि क्रूर है, कद लंबा है, बाहें छोटी हैं, चेहरा दुबला और कुरूप है। उसका स्वभाव बहुत कठोर है और वह मीठा बोलना नहीं जानती।

[05:22] राजा हंसे और बोले कि ऐसी स्त्री से तो पिंड छूट गया, अच्छा हुआ। यदि आवश्यकता हो तो मैं तुम्हारा दूसरा विवाह करा देता हूँ। [06:17] ब्राह्मण ने कहा, "शास्त्रों का आदेश है कि प्रत्येक पुरुष का कर्तव्य है कि वह अपनी धर्मपत्नी की रक्षा करे, चाहे उसका स्वभाव अनुकूल हो या प्रतिकूल। यदि उसका त्याग किया गया तो वर्णसंकर संतान पैदा होगी और पितर नरक में गिरेंगे। बिना पत्नी के धर्म, अर्थ और काम की सिद्धि नहीं हो सकती।" [08:17] राजा उत्तम ब्राह्मण की पत्नी की खोज में निकले और एक तेजस्वी ऋषि के आश्रम पहुँचे। ऋषि ने पहले अपने शिष्य से अर्घ्य लाने को कहा, फिर मना कर दिया।

[09:33] राजा ने पूछा कि मुझे अर्घ्य का अधिकारी क्यों नहीं माना गया? ऋषि ने कहा कि तुमने अपनी पत्नी का त्याग कर दिया है। जो व्यक्ति १५ दिन तक नित्य कर्म छोड़ दे वह अस्पृश्य हो जाता है, और तुमने एक वर्ष से पत्नी का त्याग किया है, इसलिए तुम्हारा नित्य कर्म फलहीन हो गया है। पति और पत्नी दोनों को एक-दूसरे का त्याग नहीं करना चाहिए।

[13:46] ऋषि ने बताया कि बला नाम का राक्षस ब्राह्मण की पत्नी को उत्पलावत जंगल में ले गया है। राजा वहाँ पहुँचे। राक्षस ने बताया कि वह केवल यज्ञों के अपूर्ण होने पर उनके पुण्य का भक्षण करता है। उसने ब्राह्मण का धर्म नष्ट करने के लिए उसकी पत्नी का हरण किया था। [17:33] राजा के कहने पर राक्षस ने ब्राह्मणी के दुष्ट स्वभाव को भक्षण कर लिया, जिससे वह सुशील और सुंदर हो गई। राजा ने उसे ब्राह्मण को सौंप दिया। [19:08] इसके बाद राजा ने अपनी पत्नी बहुला के बारे में पूछा। ऋषि ने बताया कि उसे नागराज कपोत पाताल (रसातल) ले गया है। [20:54] राजा ने राक्षस का स्मरण किया और राक्षस राजा की पत्नी बहुला को वापस ले आया। बाद में सारस्वत यज्ञ करके नागकन्या की वाणी लौटाई गई। उस रानी से जो पुत्र हुआ, वह आगे चलकर उत्तम मन्वंतर का अधिपति बना। [21:41] कथा का मुख्य संदेश यही है कि हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार किसी भी परिस्थिति में पति और पत्नी को एक-दूसरे का त्याग नहीं करना चाहिए।