कलयुग में श्रीराम नाम की सबसे गोपनीय महिमा | indresh maharaj katha | indresh ji maharaj
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Saturday, August 1, 2026
कलयुग में श्रीराम नाम की सबसे गोपनीय महिमा - Indresh ji Maharaj
Thursday, February 3, 2022
कृष्ण प्राप्ति के लक्षण, Krishna Prapti ke lakshan by Indresh Upadhyay Ji Maharaj
कृष्ण प्राप्ति के लक्षण, Krishna Prapti ke lakshan by Indresh Upadhyay Ji Maharaj
https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c
Main Points: 1 सबसे पहला,आपका हृदय, प्रेम और दया से अथाह भर गया हो मतलब, किसी सामान्य से स्थिति को देखकर के भी आपका चित्त दया से भर जाता हो, आपके नेत्र सजल हो जाते हों, समझ जाना आपको कृष्ण मिल गए अरे सामान्य सी गैया विचरण कर रही है आप सोचोगे अरे बेचारी कैसे घूम रही है, यह ऐसी भावना, सहज दया प्रकट होने लग जाए समझो कृष्ण मिल गए https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=30 2 दूसरा आपके चित्त में विकार उत्पन्न जल्दी नहीं होते हैं, सदैव शुद्ध भाव बने रहते हैं, जैसे कई लोग होते हैं उनके बहुत जल्दी विकार आ जाते हैं, किसी के सुंदर रूप को देख लिया तो काम प्रकट हो जाता है, किसी के अति धन को देख लिया तो लोभ प्रकट हो जाता है, किसी की व्यंजनों को देख लिया तो उसके प्रति आसक्ति प्रकट हो जाती है, कहीं पर व्यसन वस्तु देख ली तो उसके प्रति भोग दृष्टि प्रकट हो जाती, पर आपकी स्थिति कैसी ? आपके जल्दी विकार उत्पन्न नहीं होते, चित्त में कोई कितना भी रूपवान आपके सामने आ जाए पर आप उसके रूप को देख कर के यह विचार नहीं करते कि यह मेरा हो जाए, आप बल्कि उसके रूप को देख के यह विचार करते हो यह इतना सुंदर है तो इसको बनाने वाले ठाकुर जी कितने सुंदर होंगे, ऐसे लक्षण बहुत कम लोगों में मिलेंगे आपको पर जिन्हें मिल जाए समझ जाना इनको कृष्ण मिल गए हैं https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=108 3 तीसरा लक्षण कृष्ण प्राप्ति का क्या है, कोई आपको बोल दे, ऐसे मजाक में बोले, कि भोपाल में गंगा जी बह रही हैं, तो आप उस पर विचार नहीं करोगे, आप मान ही जाओगे, अच्छा आ गई होंगी पहले तो नहीं थी अब आ गई होंगी, इतना भोलापन चित में आ जाएगा, आप चतुराई भूल जाओगे, आप अत्यंत सहज हो जाओगे, अत्यंत भोले हो जाओगे, कोई आपको कह देगा कि आज सूर्य चंद्र एक दूसरे के गले में गल डाल कर के आकाश में बैठे हैं, तो आप इस बात को मान लोगे, आप उस पर चिंतन नहीं करोगे, अच्छा, होगा - ऐसा समझ जाओ कृष्ण मिल गए https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=200 4 चौथी बात कृष्ण प्राप्त होंगे, तो आपके अंदर स्थिति कैसी हो जाएगी व्रत करना, नियम करना, जल्दी उठना, कथा सुनना, कीर्तन करना, साधन करना, इनको आप नियम की तरह नहीं करोगे इनको आप सौभाग्य की तरह करोगे यह मेरा सौभाग्य है हमें कल आपको व्रत करना है पूरे दिन कुछ खाना नहीं है तो आप इससे विचलित नहीं होगे, आप और आनंदित हो जाओगे, जैसे बालक को कह दो कि कल हम तुझे मेला ले जाएंगे तो रात भर सोता नहीं बालक, उसको इतनी एक्साइटमेंट रहती है, ऐसी उत्सुकता व्रत के लिए, नियम के लिए, सेवा के लिए, कथा के लिए, कीर्तन के लिए, धाम गमन के लिए उत्पन्न हो जाएं, समझो कृष्ण प्राप्त हो गए https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=253 5 और पांचवा लक्षण, रेलवे स्टेशन हो, एयरपोर्ट हो, बस स्टैंड हो, पब्लिक प्लेस हो, मॉल हो, कहीं भी कोई तिलक धारी दिखाई दे जाए, कोई कंठी पहना हुआ दिखाई दे जाए, भले ही आप अपने ऑफिस के काम से हो, आप ऑफिशियल वेष भूषा में हो, लेकिन दिख जाए कि कोई वैष्णव (श्री कृष्ण के अनन्य भक्त) सामने आ गया, है तो चित्त में अत्यंत आह्लाद (आनंद, खुशी, हर्ष), परिचय नहीं है आपका उससे, जानते नहीं हो, उसको लेकिन उसके वैष्णव भाव को देखकर के आप अत्यंत आनंदित हो जाओ, अत्यंत सुख में भर जाओ, आपका मन हो कि मैं जाकर इसको प्रणाम करके आऊं, समझ जाओ आपको कृष्ण मिल गए https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=350 6 कृष्ण मिल जाने का मतलब कृष्ण कि वे संग रहेंगे ?, नहीं, मीरा भाई अकेली विचरण करती थी पर उनके हर पद में लिखा यही है, “मेरे तो गिरधर गोपाल” “मीरा के प्रभु गिरधर नागर”, मतलब प्रत्यक्ष का में दिखते नहीं है, पर उनके स्वभाव और उनके अनुभव और उनकी क्रिया से पता चलता है कि मीरा भाई के साथ कृष्ण हर दम हैं, ऐसे ही हमारा स्वभाव, हमारे लक्षण, हमारे गुण, हमारी चाल चलन, क्रिया, बताती है कि हमारे साथ कृष्ण हैं कि नहीं https://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=416 7 और कृष्ण प्राप्ति की प्रथम सीढ़ी क्या है, नाम जप, नाम संकीर्तन, ठाकुर जी के नाम का निदिध्यासन (बार-बार मनन करना या स्मरण करना), स्मरण और निरंतर उसी का चिंतन, उसी से ही यह गति पकड़ेगी, पहला gear ही है नाम जप, और उसी नाम को ही श्रीमद् भागवत में कहा गया, “परम सत्य”, “सत्यम परम धीमहि”, हम ऐसे परम सत्य भगवान श्री कृष्ण के नाम को प्रणाम करते हैं, नमन करते हैं, वंदन करते हैंhttps://www.youtube.com/watch?v=8u0_G-rqy9c&t=484
Transcript
0:00 मुझे श्री कृष्ण मिल गए इसको आप किस भाव 0:03 से देखोगे कि मेरे संग कृष्ण बैठते होंगे 0:06 मेरे संग कृष्ण खाते होंगे मेरे संग कृष्ण 0:09 सोते होंगे मेरे संग कृष्ण डोलते होंगे 0:12 इसको आप समझोगे कि इनको कृष्ण मिल गए 0:18 नहीं सब लोग बिल्कुल सावधानी से 0:22 सुनिए कृष्ण प्राप्ति के लक्षण क्या हैं 0:30 सबसे 0:32 पहला आपका हृदय, प्रेम से अथाह भर गया हो 0:38 प्रेम से अथाह गया मतलब किसी सामान्य से 0:41 स्थिति को देखकर के भी आपका चित्त दया से 0:44 भर जाता हो आपके नेत्र सजल हो जाते हो समझ 0:47 जाना आपको कृष्ण मिल गए 0:49 हैं दूसरा लक्षण सुनो अब ताली नहीं बजाओ 0:53 सुनो 0:54 बस हमें पता है आप सुन रहे हो कई बार ताली 0:58 के चक्कर में क्या होता चार लोगों ने सुनी 1:01 उन्होने बजाई 4 हज उसी के चक्कर में बजा 1:03 देते 1:05 हैं कुछ अच्छा ही बोला होगा तभी तो सब बजा 1:08 रहे हैं ताली मत बजा आप बस कथा 1:12 सुनो और हमको ताली की बहुत इच्छा नहीं है 1:15 बस जब कीर्तन किया करें तब बजाया करो 1:21 आप सबसे पहला लक्षण कि आपको कृष्ण प्राप्त 1:24 हो गए हो तो आपके चित्त में अथाह दया हो 1:28 जाएगी 1:30 अरे सामान्य सी गैया विचरण कर रही है उस 1:34 सामान्य सी गैया को विचरण करते हुए आप 1:37 सोचोगे अरे बेचारी कैसे घूम रही है यह ऐसी 1:40 भावना सहज दया प्रकट होने लग जाए समझो 1:43 कृष्ण मिल गए 1:48 दूसरा आपके चित्त 1:51 में विकार उत्पन्न जल्दी नहीं होते 1:55 हैं सदैव शुद्ध भाव बने रहते हैं जैसे कई 1:58 लोग होते हैं उनके बहुत जल्दी विकार आ 2:01 जाते 2:01 हैं किसी के सुंदर रूप को देख लिया तो काम 2:05 प्रकट हो जाता है किसी के अति धन को देख 2:07 लिया तो लोभ प्रकट हो जाता है किसी की 2:11 व्यंजनों को देख लिया तो उसके प्रति 2:12 आसक्ति प्रकट हो जाती 2:15 है कहीं पर व्यसन वस्तु देख ली तो उसके 2:19 प्रति भोग दृष्टि प्रकट हो जाती समझ रहे 2:22 ना बात 2:23 को पर आपकी स्थिति 2:26 कैसी आपकी जल्दी जल्दी विकार उत्पन्न नहीं 2:30 होते चित्त 2:31 में कोई कितना भी रूपवान आपके सामने आ जाए 2:35 पर आप उसके रूप को देख कर के यह विचार 2:37 नहीं करते कि यह मेरा हो जाए आप बल्कि 2:40 उसके रूप को देख के यह विचार करते हो यह 2:42 इतना सुंदर है तो इसको बनाने वाले ठाकुर 2:44 जी कितने सुंदर 2:45 होंगे यह इतना रूपवान है बेचारे आदत हो गई 2:50 आपकी ताली बजाने 2:53 की मारी फिर रुक ग अरे हमको तो बजानी नहीं 2:58 थी कोई बात नहीं 3:01 पर 3:02 सुनो यह हम लक्षण बता रहे हैं ऐसे लक्षण 3:06 बहुत कम लोगों में मिलेंगे आपको पर जिनम 3:09 मिल जाए ना समझ जाना इनको कृष्ण मिल गए 3:12 हैं इनके चित्त में कृष्ण है इनके साथ 3:16 कृष्ण है इसीलिए इनका स्वभाव व्यवहार ऐसा 3:19 ही Continue 3:20 है तीसरा लक्षण कृष्ण प्राप्ति का क्या है 3:25 कोई आपको बोल दे ऐसे मजाक में बोले क्या 3:28 भोपाल में गंगा जी बह रही 3:31 है तो आप उस पर विचार नहीं करोगे आप मान 3:34 ही जाओगे अच्छा आ गई होंगी पहले तो नहीं 3:37 थी अब आ गई होंगी इतना भोलापन चित में आ 3:41 जाएगा आप चतुराई भूल 3:46 जाओगे आप अत्यंत सहज हो जाओगे अत्यंत 3:50 भोले हो जाओगे समझ जाओ कृष्ण मिल 3:55 गए कोई आपको कह देगा कि आज सूर्य चंद्र एक 3:58 दूसरे के गले में गल डाल कर के आकाश में 4:00 बैठे तो आप मान लोगे इस बात को आप उस पर 4:03 चिंतन नहीं करोगे अच्छा होगा ऐसा समझ जाओ 4:06 कृष्ण मिल 4:13 गए चौथी बात कृष्ण प्राप्त होंगे तो आपके 4:17 अंदर स्थिति कैसी हो 4:20 जाएगी व्रत करना नियम करना जल्दी 4:26 उठना कथा सुनना कीर्तन करना साधन करना 4:31 इनको आप नियम की तरह नहीं करोगे इनको आप 4:34 सौभाग्य की तरह करोगे यह मेरा सौभाग्य है 4:38 कोई आपसे रात्रि 11:00 बजे बोले कि कल 4:40 सुबह 3:00 बजे उठना है तो आप आना काने अरे 4:42 राम राम नींद पूरी नहीं होने दे रहे हैं 4:44 मेरी क्या करें ये 3:00 बजे उठना है तो आप 4:47 उसके लिए इतने सौभाग्यशाली मानोगे अपने आप 4:49 अरे 3:00 बजे उठना है ठीक है सुबह तो 3:00 4:52 बजे उठेंगे हम कल आपको व्रत करना है पूरे 4:55 दिन कुछ खाना नहीं है तो आप इससे विचलित 4:57 नहीं होगे आप और आनंदित हो जाओगे अच्छा 5:00 मुझे व्रत करना 5:02 है जैसे कई लोग एकादशी का नियम ले लेते 5:05 हैं कि हमको एकादशी करनी है तो जैसे 5:07 एकादशी आने वाली हो दशमी को इतना खा लेते 5:10 हैं कि कल तो भूखा रहना है 5:13 हमको पर कृष्ण जिसके चित् में आ जाते हैं 5:17 वो व्रत को नियम की तरह नहीं सौभाग्य की 5:20 तरह करता है उत्सुकता की तरह करता 5:24 है जैसे बालक को कह दो कल हम तुझे मेला ले 5:27 जाएंगे तो रात भर सोता नहीं बालक 5:30 उसको इतनी एक्साइटमेंट रहती है इतना 5:32 प्रसन्न रहता कल मेला में जाऊंगा ऐसा ऐसी 5:35 उत्सुकता व्रत के लिए नियम के लिए सेवा के 5:39 लिए कथा के लिए कीर्तन के लिए धाम गमन के 5:42 लिए उत्पन्न हो जाए समझो कृष्ण प्राप्त हो गए 5:50 और पांचवा 5:56 लक्षण रेलवे स्टेशन हो एयरपोर्ट हो बस 6:00 स्टैंड 6:01 हो पब्लिक प्लेस हो मॉल 6:05 हो कहीं 6:07 भी कोई तिलक धारी दिखाई दे जाए कोई कंठी 6:12 पहना हुआ दिखाई दे जाए भले ही आप अपने 6:15 ऑफिस के काम से हो आप ऑफिशियल वेष भूषा 6:18 में हो लेकिन दिख जाए कि कोई वैष्णव सामने 6:22 आ गया 6:23 है तो चित्त में अत्यंत आह्लाद (आनंद, खुशी, हर्ष), परिचय नहीं 6:27 है आपका उससे 6:29 जानते नहीं हो उसको लेकिन उसके वैष्णव भाव 6:33 को देखकर के आप अत्यंत आनंदित हो जाओ 6:35 अत्यंत सुख में भर 6:40 जाओ आपका मन हो कि मैं जाकर इसको प्रणाम 6:43 करके आऊं समझ जाओ आपको कृष्ण मिल 6:51 गए यह कुछ लक्षण है कृष्ण प्राप्ति 6:56 के कृष्ण मिल जाने का मतलब कृष्ण संग 6:59 रहेंगे 7:00 नहीं मीरा भाई अकेली विचरण करती थी पर 7:04 उनके हर पद में लिख यही है मेरे तो गिरधर 7:07 गोपाल मीरा के प्रभु गिरधर नागर 7:11 मतलब प्रत्यक्ष का में दिखते नहीं है पर 7:14 उनके स्वभाव और उनके अनुभव और उनकी क्रिया 7:17 से पता चलता है कि मीरा भाई के साथ कृष्ण 7:19 हर दम 7:22 हैं ऐसे ही हमारा स्वभाव हमारे लक्षण हमारे 7:26 गुण हमारी चाल चलन क्रिया बताती है कि 7:29 हमारे साथ कृष्ण हैं कि 7:36 नहीं इसलिए 7:42 भैया कृष्ण प्राप्ति का मतलब प्रत्यक्ष 7:45 श्री कृष्ण संग रहे नहीं आपके स्वभाव में 7:50 आपके गुण में आपके व्यवहार में आपके 7:52 विचारधारा में परिवर्तन इस प्रकार का हो 7:55 जो हमने बताया समझो कृष्ण प्राप्त हो गए 8:04 और कृष्ण प्राप्ति की प्रथम सीढ़ी क्या 8:08 है नाम 8:10 जप नाम 8:13 संकीर्तन ठाकुर जी के नाम का निदिध्यासन (बार-बार मनन करना या स्मरण करना), स्मरण 8:17 और निरंतर उसी का चिंतन उसी से ही यह गति 8:22 पकड़ेगी पहला gear ही है नाम 8:26 जप और उसी नाम को ही श्रीमद् भागवत में 8:30 कहा गया परम सत्य, सत्यम परम धीमहि हम ऐसे 8:36 परम सत्य भगवान श्री कृष्ण के नाम को 8:39 प्रणाम करते हैं नमन करते हैं वंदन करते 8:43 हैं
Sunday, November 21, 2021
सपेरे को देखकर संत ने… by Indresh ji
सपेरे को देखकर संत ने…
https://youtu.be/N5ezU_qTlmI 1 पंडित श्री गया प्रसाद जी महाराज एक बार गोवर्धन में कहीं जा रहे थे, तो कहीं से दो चार सपेरे घूम रहे थे , सपेरों ने नीचे धोती, ऊपर सिर पर स्फा और ऐसे चंदन लगा रखा था, भेष ऐसा था, मानो कोई भक्त वैष्णव हों https://youtu.be/N5ezU_qTlmI&t=0 2 उनको जैसे ही देखा पंडित श्री गया प्रसाद जी महाराज दंडवत करने लगे प्रणाम करने लगे, धरती पर लेट करके, तो संग में महापुरुष थे, उन्होंने कहा कि यह सपेरे हैं, संत नहीं हैं, गया प्रसाद जी ने कहा कि मुझको तो इनमें संत दिखाई दे रहे हैं https://youtu.be/N5ezU_qTlmI&t=41 3 जबकि हमारी स्थिति ऐसी है कि हमको तो श्रेष्ठ संत में भी कोई ना कोई कमी दिख जाती है https://youtu.be/N5ezU_qTlmI&t=87 4 जब तक आपको किसी दूसरे में दोष दिखाई देने बंद ना हो, तो अपने आप को भक्त मत कहलाइए, अपने आप को वैष्णव मत कहलाइए https://youtu.be/N5ezU_qTlmI&t=116 5 ना किसी के दोष पर घृणा करना, ना किसी के गुण पर रीझना (ताकि आपकी उसमें आसक्ती ना हो जाए), बस समत्व (equal, neutral) रहना, मगर शुरुआत गुण देखने से करिए https://youtu.be/N5ezU_qTlmI&t=144 6 जितना भी आप पूजा, पाठ, परिक्रमा, आरती करते हो, सबका फल यह है कि आपका स्वभाव बदले (आपका मन निर्मल हो यानी संसार का मोह छूटे), नहीं तो रावण जैसा कोई शिव उपासक नहीं था https://youtu.be/N5ezU_qTlmI&t=194
Saturday, November 20, 2021
हमारे जीवन में इतने दुख क्यों आते हैं, इनसे कैसे निबटा जाए by Indresh ji
Friday, November 19, 2021
दो बेटियों में फस गया बाप।। श्री इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी
दो बेटियों में फस गया बाप।। श्री इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी
1 एक व्यक्ति के दो बेटियां थी एक कुमहार के घर ब्याह दी, एक किसान के यहां - वहां गया किसान के यहां तो बेटी ने कहा प्रार्थना करो कि खूब बारिश हो फसल अच्छी हो मगर दूसरी के पास गया, कुमहार की बहु, तो उसने कहा प्रार्थना करो कि खूब सूखा पड़े ताकि हमारे घड़े अच्छी तरह से पक जाएं https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=0 2 कई बार ऐसी परिस्थितियां आती हैं जीवन में जब हम टूट जाते हैं मगर कुछ वर्षों बाद मालूम पड़ता है कि अगर वह स्थिति ना आई होती तो आज हम यहां नहीं होते https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=80 3 एक उदाहरण सुनिए, एक व्यक्ति का जिसकी छोटी उम्र में ही मां-बाप चले गए, सब भाई बहनों का बोझ उसने बचपन से ही संभाला भगवान से कहता था कि यह क्या कर दिया भगवान मगर आज भगवान को धन्यवाद करता है कि वह परिस्थिति ना होती तो मैं यहां नहीं होता https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=109 4 विवेकानंद जी कहते थे कि यदि किसी के जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियां ना आएं तो समझो वह जी नहीं रहा https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=178 5 यदि अनुकूल वातावरण हो तो भक्त बनना ज्यादा मुश्किल नहीं मगर प्रतिकूल परिस्थितियों में गृहस्थ जीवन में भक्ति करना,भक्ति का माहौल न भी हो, तब भी भक्ति कर पाना असली भक्ति है https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=224 6 भक्त प्रहलाद का उदाहरण, नरसिंह भगवान खंबे से प्रकट हो गए https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=313 7 गृहस्थ आश्रम एक प्रतिकूल वातावरण है भक्ति के लिए चुनौती है, ठाकुर जी को भी ग्रहस्थ आश्रम के भक्त अधिक पसंद है बजाए की बैरागी और सन्यासियों के https://youtu.be/gopqGRnpzWk&t=372 Standby link (in case youtube link does not work): दो बेटियों में फस ☹️गया बाप।। श्री इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी.mp4Wednesday, November 17, 2021
बहुत प्यार ठाकुर जी का भक्त जिसके ठाकुरजी ऋणी हो गए - by Indresh Ji
बहुत प्यार ठाकुर जी का भक्त जिसके ठाकुरजी ऋणी हो गए
https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU 1 बहुत वर्षों तक बिहारी जी ने एक भक्त अलबेला को दर्शन दिया लेकिन एक दिन एक अचंभा हुआ, बिहारी जी के दर्शन नहीं हुए, जबकि बाकी सब को हुए, ऐसा 3 अलग अलग बार हुआ https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=30 2 अलबेला ने सोचा, जिस देह से बिहारी जी के दर्शन नहीं हो सकते ऐसी देह का क्या फायदा मैं प्राण त्याग दूंगा https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=211 3 एक कुष्ट रोगी (leprosy) ने अलबेला को कहा : बिहारी जी ने मुझे स्वप्न में आप से मिलने की प्रेरणा दी थी कि आप यदि भगवान से कहेंगे तो मेरा कुष्ट रोग ठीक हो जाएगा https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=330 4 और जैसे ही अलबेला ने भगवान से प्रार्थना की उस व्यक्ति का कुष्ट रोग निवृत्त हो गया https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=521 5 अलबेला के सामने श्री बिहारी जी प्रकट हो गए https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=450 6 बिहारी जी ने अलबेला को कहा कि सब लोग अपना अपना दुखड़ा रोते हैं मेरे सामने, मगर तूने आज तक कुछ नहीं मांगा https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=475 7 संसार के लोग मुझसे कुछ ना कुछ मांगते रहते हैं तुमने कुछ नहीं मांगा, इसलिए मुझ पर ऋण सा लगता है कि मैं तुझे कुछ दूं यदि तू कुछ मांगे https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=518 8 जैसे कोई ऋण देने वाला ऋण लेने के वाले के पास आए तो ऋण लेने वाला भाग जाता है, ओझल हो जाता है, ऐसे ही मैं तुझसे ओझल हो गया था, क्योंकि मुझ पर तेरा ऋण था https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=568 9 जो ठाकुर जी से कुछ नहीं मांगता, शांत रहता है उनके सामने ऐसा भक्त ठाकुर जी को अति प्रिय है https://youtu.be/Hlb5qPPz5LU&t=607Tuesday, November 16, 2021
ठाकुर जी (श्री कृष्ण) को एकादशी क्यों प्रिय है by Indresh Ji
ठाकुर जी (श्री कृष्ण) को एकादशी क्यों प्रिय है by Indresh Ji https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs 1 ठाकुर जी को अकेली एकादशी नहीं, सारे दिन ही प्रिय हैं https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs&t=10 2 वैष्णव का करवा चौथ है एकादशी, जैसे करवा चौथ के दिन पत्नी व्रत करती है तो पति को बढ़िया लगता है (एसे ही वैष्णव भक्त जब एकादशी का व्रत रखते हैं तो भगवान को अच्छा लगता है) https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs&t=26 3 जिस दिन आप अन्य सेवन नहीं करते हैं, उस दिन आपकी एक दिन की आयु बढ़ जाती है क्योंकि हमारी आयु दो चीजों से घटती है, (1) ज्यादा बोलने से और (2) ज्यादा खाने से https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs&t=51 4 लोग मुझे देख कर के हंस रहे हैं, बोले आप तो चार घंटा बोलते हो, आपकी आयु तो बहुत कम होगी, हमारे शास्त्र आज्ञा करते हैं कि जब आप भगवत वचन बोलते हो, तब आप मौन ही माने जाते हो (पूरा समय हम भागवत चिंतन और बातचीत में ही बिताते हैं, यानी पूरा दिन हम मौन ही रहते है हैं) ; जब आप समाज की बातें करते हो, किसी की निंदा स्तुति करते हो, तब आपकी बोलने की गणना होती है https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs&t=76 5 एकादशी के दिन पाप का निवास होता है इसलिए व्रत करना चाहिए, दूसरा कारण यह होता है कि अपनी कोई विशिष्ट वस्तु आप ठाकुर जी को अर्पित करो, आप पुष्प अर्पित करो, सुंदर भोग बना के अर्पित करो, सुंदर पोशाक बना के अर्पित करो https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs&t=159 6 हमारे पास सबसे बहुमूल्य क्या है, हमारा प्रत्येक दिन का जीवन, इससे ज्यादा बहुमूल्य कुछ नहीं है हमारे पास और जब एकादशी के दिन हम व्रत करते हैं तो पूरे दिन हम कुछ नहीं खाते, मतलब उस दिन की आयु हमारी बच गई और हम ठाकुर जी को देख कर के एकादशी के दिन अर्पित कर देते हैं, मतलब अपनी एक दिन की आयु हमने ठाकुर जी को अर्पित कर, उनको चाहिए नहीं पर हम अर्पित कर देते हैं, इसलिए ठाकुर जी को एकादशी व्रत करने वाले बड़े प्रिय हैं https://www.youtube.com/watch?v=_fbvzVjrFWs&t=180 Standby link (in case youtube link does not work) ठाकुर जी को एकादशी क्यों प्रिया है 🤔 एकादशी के जन्म का क्या विशेष है 🥰🥰.mp4
Monday, November 15, 2021
ठाकुर जी से हमें कैसी ज़िद करनी चाहिए - by Indresh Ji
ठाकुर जी से हमें कैसी ज़िद करनी चाहिए - by Indresh Ji 1 *जैसे एक बालक की जिद होती है, किसी वस्तु के प्रति, जैसे हमारे ठाकुर जी जिद करते हैं यशोदा मैय्या से कि मुझे चंद्रमा खिलौना चाहिए, हमने कभी ठाकुर जी के लिए ऐसी जिद नहीं की* *Just like a child is adamant about something, just like our Lord Krishna insists to Yashoda Maiyya that He wants moon as a toy, we never insisted like this for Lord Krishna* https://youtu.be/2ZbFC1CS_CU&t=296 2 *एकादशी का मतलब खाली व्रत नहीं, एकादशी का मतलब है कि हमारी श्री कृष्ण से मिलने की उत्कंठा (तीव्र अभिलाषा, strong desire) बड़े, उपवास (उप (समीप, नजदीक)+वास) बड़े, ताकि हम ठाकुर जी (श्री कृष्ण) के समीप वास करने लगें* *Ekadashi does not mean just fasting, Ekadashi means that our eagerness to meet Shri Krishna (strong desire) should increase, our nearness to God Krishna should increase* https://youtu.be/2ZbFC1CS_CU&t=330 3 *हमारा श्री कृष्ण से संबंध तो है, बस हम भटक गए हैं, हम खो गए हैं, हम इस संबंध को जान, पहचान नहीं पा रहे (और यही भूल हमें 84,00,000 योनियों में भटका रही है)* *We do have a relationship with Shri Krishna, but we have strayed, we are lost, we are unable to know and recognize this relationship (and this blunder is making us wander in 84,00,000 births)* https://youtu.be/2ZbFC1CS_CU&t=418 Standby link (in case youtube link does not work) ठाकुर जी से हमें कैसी ज़िद करनी चाहिए II श्री इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी.mp4
Saturday, November 13, 2021
शिष्यों ने तोड़ दिए गुरू जी के पैर - by Indresh Ji
शिष्यों ने तोड़ दिए गुरू जी के पैर - by Indresh Ji
https://www.youtube.com/watch?v=gh4Sj0aD0Jw 1 एक गुरुजी रात्रि में शयन कर रहे थे तो शिष्य उनके चरण दबा रहा था और चरण दबाते दबाते, गुरुजी उससे बात करते जा रहे हैं, तो तुम्हारे खानदान में कितने लोग हैं https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=6 .... 2 पहला उदाहरण : फिर गुरु जी को नींद आ जाती है मगर ज्यों ही शिष्य चरण छोड़ता है, तो फिर से जाग कर दोबारा वही प्रश्न पूछते हैं, जब बहुत बार ऐसा हो गया, सुबह हो गयी पूरी रात पांव दबाता रहा .... 3 गुरु जी ने पूछा कितने भाई हो, गुरु जी हम तीन भाई हैं, गुरुजी उठ गए, बोले रात को तो चार बता रहे थे अब तीन, शिष्य बोला इस प्रकार पैर दबाता रहूंगा, एक (यानी मैं) तो पधार ही जाएगा ना, तीन ही बचेंगे https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=132 4 ऐसा नहीं होना चाहिए, गुरु कैसा भी हो लेकिन आपके भीतर उसके प्रति धैर्य और निष्ठा होनी चाहिए https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=148 5 दूसरा उदाहरण : एक गुरु जी के आश्रम में दो शिष्य पहुंच गए और दोनों शिष्य थोड़े से भोजन भट्ट शिष्य थे, उनको केवल यही प्रलोभन था आश्रम में आने का कि गुरुदेव की थोड़ी बहुत सेवा करेंगे और तीन समय का भोजन मिल जाया करेगा, उन शिष्यों में बुद्धि तत्व थोड़ा कम था https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=194 6 गुरु जी ने विचार किया और उन्होंने दोनों शिष्यों को अपना एक एक पैर बांट दिया, एक शिष्य को अपना दायना पैर दे दिया और दूसरे शिष्य को अपना बाया पैर, बोले अब तुम दोनों इस इन पैरों को दबाया करो और एक दूसरे से होड़ रखा करो, कौन ज्यादा बढ़िया दबाए https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=228 7 एक दिन गुरु जी एक पैर पर दूसरा पैर रख कर के लेटे हुए थे, जिस पैर के ऊपर दूसरा पैर रखा था उस पैर वाला शिष्य आ गया, उसने आकर के गुरुदेव को देखा तो देखा कि मेरा पैर नीचे दबा हुआ है और वो जो दूसरा गुरु भाई है, उसका पैर मेरे ऊपर चढ़ा हुआ है इसकी इतनी हिम्मत, मेरी सेवा वाले पैर पर चढ़ गया ? https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=279 8 अभी रुक अभी बताता हूँ, तुरंत कहां से ना जाने बड़ा सा बांस का डंडा लेकर के आया और गुरुदेव का वह पैर जो उसके सेवा वाले पैर पर था, उसको हटा करके और उसने उठा करके और डंडा देकर के बजाना शुरू किया, गुरुदेव का पैर गुरुजी चिल्ला उठे, चीखे – मंद बुद्धि शिष्य ने गुरु जी का पैर तोड़ दिया https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=307 9 उसके जाते दूसरा शिष्य आया, दूसरे शिष्य ने आकर के देखा तो गुरुजी बेचारे लंगड़ा रहे थे, पैर में से रक्त निकल रहा, पूरा पैर सूझ गया और उसने कहा गुरुदेव, ये मेरे वाले पैर को क्या हुआ, यह सूज कैसे गया https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=360 10 गुरुजी ने सोचा बेचारा यह तो थोड़ा बुद्धिमान है, इसको पूरा वर्णन बता देता हूँ https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=393 11 दूसरे शिष्य ने कहा कि इससे तिगुना ताकत से मारूंगा और गुरु जी का दूसरा पैर जो सही सलामत जो था, उसको पकड़ कर के उसने मारना शुरू किया https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=429 12 दोनों शिष्यों की मूर्खता से गुरु जी पछताए https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=446 13 गुरु श्रेष्ठ है लेकिन शिष्य के अंदर (1) गुरु के प्रति भगवत भाव (2) शिष्यत्व भाव होना चाहिए (3) गुरु के प्रति जिज्ञासा (4) गुरु के व्यवहार के प्रति धैर्य (5) गुरु की सेवा में किसी भी प्रकार का कोई भेद और आलस्य नहीं होना चाहिए https://youtu.be/gh4Sj0aD0Jw&t=451 Standby link (in case youtube link does not work) https://1drv.ms/v/s!AkyvEsDbWj1gndR9Ym9lSlMafdYJQw?e=Jud5Xj