श्री कृष्ण चरणों में शरणागति - भक्ति की पहली और अंतिम सीढ़ी by Shri Kripalu ji
https://www.youtube.com/watch?v=K8fGElESLeMIt is all about Krishna and contains list of Holy Spiritual Books, extracts from Srimad Bhagvat, Gita and other gist of wisdom learnt from God kathas - updated with new posts frequently
Sunday, August 2, 2026
श्री कृष्ण चरणों में शरणागति - भक्ति की पहली और अंतिम सीढ़ी by Shri Kripalu ji
सारे Tension की केवल एक जड़ और एक इलाज | Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj Pravachan
सारे Tension की केवल एक जड़ और एक इलाज | Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj Pravachan
"बार बार प्रवचन सुनें - फिर देखें Result || Jagadguru Kripalu Ji Maharaj"
"बार बार प्रवचन सुनें - फिर देखें Result || Jagadguru Kripalu Ji Maharaj"
Https://youtu.be/L-OhyGNAqWoOnlyमाया का The End – सिर्फ एक Simple तरीका! | भगवत तत्त्व - 12/16 | Jagadguru Shri Kripalu Ji Pravachan:
माया का The End – सिर्फ एक Simple तरीका! | भगवत तत्त्व - 12/16 | Jagadguru Shri Kripalu Ji Pravachan:
https://www.youtube.com/live/xRtsEgyhwTwतुमको भगवान् पकड़ेंगे - तुम कभी नहीं गिरोगे | भगवत् प्राप्ति का साधन - 6/6 | Jagadguru Shri Kripaluji
तुमको भगवान् पकड़ेंगे - तुम कभी नहीं गिरोगे | भगवत् प्राप्ति का साधन - 6/6 | Jagadguru Shri Kripaluji
https://www.youtube.com/live/QPW0EEEGtogI First the Gist in Hindi with timestamps, thereafter Full Transcript is givenमन और माया की मिली-भगत - जो करती है आपको fail || Jagadguru Kripalu Ji Pravachan
मन और माया की मिली-भगत - जो करती है आपको fail || Jagadguru Kripalu Ji Pravachan
https://youtu.be/XaY4qz9nPB0?si=LuVy-FT8LZYI17Kc First the Gist in Hindi with timestamps, thereafter Full Transcript is given:कैसे जानूँ कि मैं कौन हूँ? किसका हूँ? Who am I? Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कैसे जानूँ कि मैं कौन हूँ? किसका हूँ? Who am I? Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
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00:22 माया के प्रभाव और अज्ञान के कारण जीव अनंत जन्मों से यह भूल चुका है कि वह वास्तव में कौन है और उसका वास्तविक संबंधी कौन है। 04:19 मायाबद्ध होने के कारण मनुष्य स्वयं यह सत्य नहीं जान सकता, इसलिए केवल निर्दोष और प्रामाणिक वेद-वाणी ही इस रहस्य को स्पष्ट करती है। 08:16 वेद और शास्त्र प्रमाणित करते हैं कि प्रत्येक जीव परमात्मा का ही नित्य अंश, पुत्र और उनकी शक्ति है। 11:25 भौतिक संसार और माया पूरी तरह 'जड़' हैं, जबकि जीव 'चेतन' है; अतः चेतन जीव का सच्चा संबंध केवल परम चेतन भगवान से ही हो सकता है। 14:21 भगवान ही जीव के एकमात्र निस्वार्थ सखा हैं, जो हर जन्म में साथ रहकर बिना किसी स्वार्थ के हमें शक्ति और कर्मफल प्रदान करते हैं। 16:46 जिस प्रकार समुद्र की तरंगें समुद्र से ही उत्पन्न होती हैं और उसी में लीन हो जाती हैं, उसी प्रकार जीव का शाश्वत अस्तित्व केवल भगवान से ही जुड़ा है।
Full Transcript :
Saturday, August 1, 2026
गुरु से परे कोई तत्व नहीं है | गुरु तत्त्व क्या है? - 1 /3 Jagadguru Shri Kripalu Ji
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00:03:00 प्रवचन की शुरुआत हरि नाम संकीर्तन और गुरु तत्व की महिमा का परिचय देकर की गई है।
00:06:44 वेदव्यास जी के कथनानुसार गुरु से परे कोई तत्व नहीं है, जबकि वेदों में परब्रह्म श्री कृष्ण को ही सर्वोत्तम बताया गया है।
00:08:22 उपनिषदों के अनुसार सृष्टि में ब्रह्म, जीव और माया—ये तीन अनादि, अनंत एवं शाश्वत तत्व विद्यमान हैं।
00:12:44 भगवान श्री कृष्ण की माया से मुक्ति केवल उनकी और गुरु की शरणागति एवं कृपा से ही संभव है।
00:14:17 ब्रह्म का वास्तविक स्वरूप 'आनंद' है और प्रत्येक जीवात्मा उसी आनंद का अंश होने के कारण सदैव केवल सुख की ही खोज करती है।
00:19:36 तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार जब तक जीवात्मा उस परम आनंद (ईश्वर) को प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक उसे वास्तविक सुख नहीं मिल सकता।
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Full Transcript :
00:00:01 के 00:00:05 धरपण मारजनम 00:00:13 भव महा 00:00:17 दावा 00:00:21 अग्नि निर्वापणम 00:00:29 श्रेय कव चंद्रिका वितरणम 00:00:40 विद्या बधु जीवनम 00:00:52 आंदा 00:00:58 बुद्धि वर्धनम प्रतिपदम 00:01:05 पूर्णता 00:01:10 स्वाधनम 00:01:16 सर्वात्मपनम 00:01:20 परम विजयते 00:01:26 श्री कृष्ण संकीर्तनम 00:01:38 नमः कमलना 00:01:54 नमः कमल माने 00:02:05 नमः कमल पाय 00:02:16 नमस्ते कमले क्षण यो ब्रह्माम विधा पूर्वम जो वेदा प्रहणो तस्मै त देवात्म बुद्ध प्रकाशम मुमुक्षुर शरणमह प्रपदे 00:02:42 वृंदारक वृंद बंद आनंद कंद सच्चिदानंद श्री कृष्ण चंद्र चरणारविंद मकरंद मिलिंद महानुभाव थोड़ी देर हरि नाम संकीर्तन कर लीजिए 00:02:57 पश्चात 00:03:00 गुरु तत्व पर कुछ प्रकाश डाला जाएगा भजो गिरधर 00:03:10 गोविंद गोपाला 00:03:21 गोविंद गोपाल 00:03:29 जो गिरधर 00:03:34 गोविंद गोपाला 00:03:45 गोविंद गोपाला 00:03:53 भज 00:03:58 गोविंद गोपाला 00:04:08 गोविंद गोपाल 00:04:16 भजो गिरधर गोविंद गोपाला 00:04:32 गोविंद गोपाल 00:04:39 भज गिरध 00:04:43 गोविंद गोपाला 00:04:53 गोविंद गोपाला 00:04:59 भज गिरिधर 00:05:04 गोविंद गोपाला 00:05:13 गोविंद गोपाला 00:05:19 बोलिए वृषभान नंदिनी राधा रानी की जय 00:05:27 अब आप लोग सावधान हो हो जाए आप लोग इसी आशा से आए होंगे कि गुरु तत्व पर कुछ प्रकाश 00:05:38 डाला जाएगा 00:05:43 किंतु गुरु तत्व पर प्रकाश डालने की सामर्थ्य केवल श्रोतय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष के पास ही है और कोई गुरु तत्व 00:06:01 पर प्रकाश नहीं डाल सकता फिर भी जब आप लोगों की इच्छा है तो हमको सेवा करना है कुछ ऐणा 00:06:12 बहणा जो कुछ होगा आपके सामने प्रस्तुत करेंगे 00:06:20 सबसे बड़ी अथॉरिटी वेदभ्यास है वेद के ज्ञाता 00:06:30 और 4 लाख श्लोक के रचयिता वेदांत के रचयिता गीता के रचयिता 18 पुराण के रचयिता उन वेदव्यास ने कहा 00:06:44 है नास्त तत्वम गुरु परम बड़ा भयानक वाक्य है गुरु से परे कोई तत्व नहीं 00:07:00 अब कोई ऐसे कैसे कह दे कि वेदव्यास भांग पी के ले गए होंगे अरे भगवान के अवतार हैं वेदव्यास 00:07:13 थोड़ा विचार करें इस पर ऐसा क्यों लिखा क्यों इसलिए कि समस्त वेद उपनिषद कहते हैं कि परात पर तो 00:07:24 ब्रह्म है श्री कृष्ण उससे परे और कोई नहीं है देखो वेद कह रहा है कि तीन तत्व हैं संजुक्त 00:07:37 में ततक्षर व्यक्तम भरते विश्व अनीष्यात्मा बते भोक्त भावा ज्ञात्वा देवम मुते सर्वपाश श्वेताकरोपनिषद कृष्ण यजुर्वेदीय शाखा का यह उपनिषद 00:08:01 है 00:08:04 यह पहले अध्याय का आठवां मंत्र है अर्थात तीन तत्व हैं एक वो एक मैं एक ये वह माने ब्रह्म 00:08:22 भगवान परमात्मा अनेक नाम और मैं माने जीव आत्मा और यह माने माया ये तीन तत्व अनाद अनंत शाश्वत हैं 00:08:40 इन तीनों में किसी ने किसी को बनाया नहीं और कोई किसी का नाश नहीं कर सकता 00:08:49 कहने को तो माया जड़ है लेकिन है अनाध्य अनंत भगवान उसको समाप्त नहीं कर सकते अगर कर सकते होते 00:09:03 तो हम सब लोगों का क्या सौभाग्य होता आनंदमय हो जाते 00:09:11 तो यह तीन तत्व अनादि है इसके आगे फिर कहा श्वेतापनिषद ने ज्ञजा भीष भजा हेका भोक्त भोग्यार्थ युक्त अनंतत्मा 00:09:30 विश्व रूप्ता त्रयं जदा ब्रह्म में तत ये श्वतापनिषद का पहले अध्याय का नौवा मंत्र है इसमें कहा एक ज्ञ 00:09:46 है ज्ञ माने सर्वज्ञ और एक अज्ञ है सर्वज्ञ भगवान और अज्ञ जीव और एक माया है वो जड़ है 00:10:03 ये जीव उसका उपभोग करती है जीवात्मा उस माया का उपभोग करती है यानी संसार का भगवान नहीं करते वह 00:10:16 दृष्टा है देखते रहते हैं और जीवात्मा भोगता है और आगे चलिए क्षरम प्रधानमता क्षरम हर क्षरात्मते देव एक तस्याना 00:10:34 जो तत्व भावात भूते विश्व माया निवत्त ये भी श्वेता उपनिषद का मंत्र है पहले अध्याय का दवां मंत्र यह 00:10:49 भी कहता है एक क्षर है माया प्रधान भी कहते हैं उसको और अमृताक्षरम हर और अमृत अक्षर जो है 00:11:00 वो जीव है 00:11:04 और इन दोनों का जो शासक है गवर्नर नियामक वह भगवान है तीसरा तत्व और आगे स्पष्ट किया एतम नित्यवा 00:11:21 संस्थ ना परम वेदव्यम कििंचित भोक्ता भोग्यम प्रेरित्वा सर्वम प्रोक्तम त्रिविध ब्रह्म में तत ये श्वेतापनिषद का है ये पहले 00:11:38 अध्याय का 12वा मंत्र है इसमें कहते हैं देखो भाई बस तीन तत्व को जान लो और कुछ जानना नहीं 00:11:49 वही तीन तत्व ब्रह्म जीव माया तीनों को ब्रह्म कहा वेद ने त्रिविध ब्रह्म में तत ये तीन प्रकार का 00:12:02 ब्रह्म है अनादि है शाश्वत है कहने को तो माया जड़ है और बहुत से तो सर फिरों ने कहा 00:12:11 है मिथ्या है यहां तक कह दिया है लेकिन दवी हे गुणमई मम माया दुरतया मामेव ये प्रपद्यते माया मेंता 00:12:27 तरते गीता सातव अध्याय का 14वा श्लोक ये मेरी दैवी माया मेरी माया है मेरी ध्यान मेरी माया है बिना 00:12:44 मेरी शरणागति के बिना मेरी कृपा के कोई भी योगी ऋषि मुनि तपस्वी माया से उत्तीर्ण नहीं हो सकता स्वर्ण 00:12:58 अक्षरों में लिख लो कोई हो ब्रह्मा विष्णु शंकर भी क्यों ना हो बिना मेरी शरणागति और मेरी कृपा के 00:13:12 ना माया निवृत्ति होगी ना मुझको कोई जान सकता है ना मुझको कोई पा सकता है 00:13:22 तो तीन तत्व है इन्हीं को जान लेना है बस इतनी सी बात है और इन तीन में दो तत्व 00:13:31 ऐसे हैं जो शास्त्र है और एक तत्व है शासक नियामक भगवान जीव और माया पर नियामन करते हैं शासन 00:13:45 करते हैं 00:13:49 क्यों जी इन तीनों को जानने से लाभ क्या है क्यों जाने हम इन तीनों को तो वेद ने कहा 00:14:02 आनंदो ब्रह्मानात आनंदा देव खलमान भूतानी जायंते आनंद जातानी जीवती आनंदम प्रयंतम विषती वो जो है वो जिसको हम कह 00:14:17 रहे हैं ब्रह्म भगवान परमात्मा उसका एक खास नाम है आनंद पर्यायवाची है वो आनंद कहो चाहे भगवान कहो चाहे 00:14:28 परमात्मा कहो गॉड कहो कुछ कहो उस सुप्रीम पावर का नाम है आनंद बस तो हम उसके अंश हैं इसलिए 00:14:42 नेचुरल आनंद चाहते हैं विश्व में भले ही हजारों मत चल रहे हैं आस्तिकों के भी नास्तिकों के भी भौतिकवादियों 00:14:56 के भी अध्यात्मवादियों के भी लेकिन इसमें दो मत नहीं है कि हम आनंद नहीं चाहते ऐसा कोई कहने को 00:15:08 तैयार नहीं क्यों देखो किसी दो व्यक्ति की शक्ल नहीं मिलती अकल क्या मिलेगी अंगूठा छाप नहीं मिलता लेकिन इस 00:15:21 मामले में एक चींटी से ले ब्रह्मा तक सब एक रहा है आनंद चाहिए सुखम में भूयात दुखम में माभूत 00:15:32 हमको सुख मिले दुख ना मिले और प्रैक्टिकल रूप से भी जब हम मां के पेट से नीचे गिरे तो 00:15:43 पहला काम क्या किया नारा लगाया नारा हां रोए रोने का अभिप्राय क्या भले ही मां विभोर रो रही है 00:15:57 हां जिंदा है बच्चा बड़ा अच्छा हुआ लेकिन बच्चे को क्या दुख मिल रहा है पैदा होने का जो कष्ट 00:16:07 मिल रहा है उसको निकाल कर रोकर निकाल रहा है और यह कह रहा है कि मुझे दुख नहीं चाहिए 00:16:17 ये क्या मुसीबत संसार में आने आते ही मुसीबत दुख दबाव में दुख होता है वो दुख भूल गए होंगे 00:16:27 आप लोग बहुत बड़ा दुख होता है लेकिन मां खुशी मनाती है बाप खुशी मनाता है और तमाम प्रकार के 00:16:37 ढोल बजते हैं बच्चा रोता रहे तो हमने पैदा होते ही यह बताया संसार को कि हमको आनंद चाहिए दुख 00:16:51 नहीं चाहिए तब से पूरी लाइफ आनंद आनंद कैसे मिले किसी ने कहा ऐसे हो ऐसे मिल जाएगा उधर गए 00:17:03 नहीं मिला इन कहा अरे वो बेवकूफ है इधर आओ इधर गए नहीं मिला सब जगह चप्पल जूते मिले दुख 00:17:11 मिला अशांति मिली अतृप्ति मिली अपूर्णता मिली बड़ी-बड़ी पोस्ट पर गए प्राइम मिनिस्टर हो गए बड़े-बड़े पैसे कमाने में गेट 00:17:24 वगैरह हो गए लेकिन अंदर अशांति टेंशन नींद की गोली खा के तो नींद आती है 00:17:37 लेकिन हम भाग रहे हैं उसी तरफ देख लो इसके पास 10 कार है 10 कोठी है तो अगर मेरे 00:17:45 हो जाए तो तो क्या होगा इससे जरा पूछ लो क्यों भाई तुम्हारा क्या हाल है अरे पहले पूछ लो 00:17:53 इसकी जल्दी क्या है भागने की नो नो दिख रहा है क्या पूछे अजी सुख दिखता नहीं है वो तो 00:18:02 रियलाइज किया जाता है फीलिंग में आता है इसकी क्या फीलिंग है ये तुम देख कर नहीं जान सकते ये 00:18:10 तो आदत है सबकी कहो भाई क्या हाल है ऑल राइट एक भी राइट नहीं है सब रॉन्ग है और 00:18:18 बकबक करता है ऑल राइट सभ्यता है ऐसा बोलने की बोल दिया किसी से हाथ मिलाया मुस्कुरा दिया माने सब 00:18:29 ठीक है तो हम केवल आनंद चाहते हैं क्यों हो क्यों ये सब एक मत क्यों है इसलिए कि हम 00:18:41 भगवान के आनंद के अंश है 00:18:47 ये वेद कह रहा है आनंद ब्रह्मजाना 00:18:57 रसो वैसा ये उपनिषद कह रहा है तैत उपनिषद दूसरी बल्ली का सातवां मंत्र है ये रसोव स बड़ा इंपॉर्टेंट 00:19:13 मंत्र है रसो वैसा आनंद वो है उसमें तुम्हें आनंद है नहीं कह रहा है वेद रसो व स नहीं 00:19:23 तो कहता रसो व तस्मिन ऐसा नहीं कहा वह रस है वह आनंद है और रसग्वम हेवयं उसको प्राप्त करके 00:19:36 ही लगा दिया एव अम ये जीवात्मा आनंदमय हो सकता है बस एक उपाय है 00:19:51 और फिर वेद यह भी कहता है कि देखो भाई वो जो ब्रह्म है उससे परे कुछ नहीं है यस्मात 00:20:04 परम ना परमस्त कििंचित यस्म नाणियों नजयोस्त कश्चित श्वेता शतरोपनिषद के तीसरे अध्याय का नौवा मंत्र है 00:20:24 कोई पर तत्व इसके आगे नहीं है गुरु कहां से आठ अफक पड़ा वेद कह रहा है कि उससे परे 00:20:30 कोई तत्व नहीं अरे गीता तो आप लोगों ने पढ़ी होगी मत परम्य किंचित धनंजय अर्जुन मुझसे परे कुछ नहीं 00:20:42 है सातवें अध्याय का सातवां मंत्र श्लोक तो भगवान से परे कोई तत्व नहीं है फिर ने