Sunday, August 2, 2026

सारे Tension की केवल एक जड़ और एक इलाज | Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj Pravachan

सारे Tension की केवल एक जड़ और एक इलाज | Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj Pravachan


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First the Gist in Hindi with timestamps, thereafter Full Transcript is given:

00:07 भगवान और सिद्ध संतों को छोड़कर संसार का प्रत्येक जीव दुखी है, जिसका एकमात्र कारण सांसारिक कामनाएं बनाना है। 01:11 राजा देवता बनना चाहता है और देवता इंद्र बनना चाहता है, अर्थात सांसारिक कामनाएं कभी समाप्त नहीं होतीं बल्कि निरंतर बढ़ती जाती हैं। 04:02 काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे सभी मानसिक विकार केवल कामना से ही जन्म लेते हैं। 05:24 कामना पूरी होने पर लोभ पैदा होता है और पूरी न होने पर क्रोध व अवसाद उत्पन्न होता है। 06:57 वेद और उपनिषद कहते हैं कि यदि मनुष्य सांसारिक कामनाओं का त्याग कर दे, तो वह समस्त दुखों से मुक्त होकर ब्रह्म के समान शांत हो जाता है। 13:45 प्रहलाद जी ने भगवान नृसिंह से यही वरदान मांगा कि उनके मन में कभी किसी वस्तु को मांगने की कामना ही उत्पन्न न हो। 21:03 प्रत्येक जीव स्वाभाविक रूप से आनंद चाहता है क्योंकि वह सच्चिदानंद भगवान का ही अंश है। 23:31 बुद्धि के निर्णय के कारण जीव सांसारिक नाशवान वस्तुओं में सुख ढूंढता है और भ्रमित होकर भटकता रहता है। 31:30 सांसारिक कामनाएं ही समस्त दुखों की जड़ हैं, जबकि भगवान से संबंधित कामना मनुष्य को सदा के लिए परमानंद से परिपूर्ण कर देती है। ------------
Full Transcript:
00:01 विश्व का प्रत्येक  00:07 जीव अथवा यों कहिए भगवान को छोड़कर अथवा भगवान को प्राप्त किए हुए महापुरुषों को छोड़कर शेष सब दुखी  00:26 है सब दुखी है  00:35 क्यों संसारी कामनाएं बनाने के  00:42 कारण रीजन  00:49 कामना चक्र धरो प सुरम सुरत लाभे सकल सुर पतिम सुरपति रू गतिम तथापि न निवत  01:11 तृष्णा संपूर्ण विश्व का अगर कोई राजा हो जाए एक देश का नहीं तो वह देवता बनना चाहता है कि  01:29 मृत्यु लोक में शरीर भी गंदा संसार भी गंदा स्वर्ग लोक में सब चीजें दिव्य  01:48 दिव्य और जब देवता बन जाता है तो कहता है बन तो गया देवता लेकिन इंद्र के अंडर में रहना  01:59 पड़ता है उसको नमस्कार करना पड़ता है पूजा करनी पड़ती है उसकी आज्ञा माननी पड़ती है इंद्र बन जाता अगर  02:14 अगर इंद्र बन गया तो सुरपति ब्रह्मम पदम या चते ब्रह्मा बन जाता अगर  02:27 में ये कामनाएं चली जाती है ऐसे ही बढ़ती हुई और हम लोग कितने मूर्ख है कि एक भिखारी सोचता  02:42 है एक लाख मिल जाए अगर कहीं पड़ा  02:50 हुआ आनंद ही आनंद एक लाख वाला कहता है 50 लाख मिल जाए एक करोड़ मिल  03:12 जाए लेकिन जरा अपने आगे वाले से पूछ लो अपने भारत में ही एक आदमी 20 अरब डॉलर का है  03:24 मुकेश अंबानी जरा उनसे पूछ लो भाई तुम्हारा क्या  03:32 अगर वह कह दे साहब ठीक है तो चलो मुकेश की सीट पर पहुंचने के लिए  03:45 भागो अरे जब सुरपति नहीं तृप्त है तो फिर इंडिया या दुनिया का कोई आदमी क्या तृप्त होगा शरीर भी  04:02 रोगी मन भी रोगी सबसे बड़ी मुसीबत तो मन की है क्योंकि कामना तो मन से बनती है काम क्रोध  04:13 लोभ मोह यह सारे दोष कामना से पैदा होते हैं कामना माने इच्छा  04:27 ख्वाहिश यह जननी है मां है सबकी इसी के बच्चे हैं सब क्यों कामना पूरी हो गई आनंद मिल गया  04:42 एक सेकंड को जैसे जलती हुई आग में घी डाला तो आग नीचे को हुई ला और फिर तिनी  04:58 बढ़ी ऐसे ही कामना पूरी होने पर क्षणिक सुख मिला अब क्या करना चाहिए एक करोड़ तो मिल गया अब  05:12 इसका ऐसा प्लान बनाया जाए कि एक अरब हो जाए ब लग गई बीमारी यानी लोभ पैदा हुआ कामना की  05:24 पूर्ति में लोभ खड़ा है और अगर ना पूरी हुई घाटा हो गया शेर डाउन हो गया तो क्रोध फीलिंग  05:42 आत्महत्या य सब हो रहा है संसार में आप सब लोग जानते हैं यानी कामना पैदा हुई कि बस हम  05:52 मर गए अब नहीं बच सकते पूरी हो तो लोभ आया ना पूरी हो तो क्रोध या अब दो में  06:01 एक तो  06:05 होगा इसलिए वेद कहता है यदा सर्वे प्रम चते कामा यस हद शता अथ मर्त्य मृतो भवत त्र ब्रह्म  06:24 समते कठोपनिषद दूसरे अध्याय के ती श्री बल्ली का 14वां मंत्र यह मंत्र बृहदारण्यक उपनिषद में भी है चौथे अध्याय  06:41 के चौथे ब्राह्मण का 17 वा मंत्र यह मंत्र सायनी उपनिषद में भी है 27 वा मंत्र ये सब वेद  06:57 मंत्र कह रहे हैं कि अगर कामनाएं आप ना बनावे छोड़ दे कामना बनाना आप ब्रह्म के बराबर हो जाए  07:09 सब दुख खत्म  07:16 आनंद ऐसा कभी किया है आप लोगों ने हां जी रोज करते हैं रोज करते हैं हां कब जब आप  07:28 गहरी नींद में में सोते हैं गहरी नींद जिसमें सपना भी नहीं देखते ऐसी नींद उस समय कोई कामना नहीं  07:41 होती नहीं जी मन ही नहीं रहता कोई फीलिंग नहीं होती ना भीतर की ना बाहर की ना अपनी ना  07:53 दूसरे की आनंद आनंद एक झलक मिलती है हम लोगों को कामना रहित अवस्था की भगवान देते हैं वह सबको  08:09 गधे को भी कुत्ते बिल्ली को भी देते हैं फुटपाथ पर सोने वाला वो भी गहरी नींद में थोड़ी देर  08:20 को सही सोता  08:28 है  08:36 एक बड़ा सुंदर प्रकरण है भागवत  08:43 में आप लोगों ने सुना होगा प्रहलाद के पिता हिरण कसप ने प्रहलाद पर बड़ा अत्याचार किया तो भगवान का  09:00 अवतार हुआ था नरसिंहा अवतार तो जब नरसिंह भगवान ने हिरण कश्यप को मार दिया और सब ब्रह्मा विष्णु शंकर  09:17 इंद्र  09:20 सब  09:24 पहुंचे अभिनंदन करने धन्यवाद देने नरसिंह भगवान को कि आपने बड़ी कृपा की बड़ा भयानक राक्षस थाव तो प्रहलाद ही  09:40 आगे बढ़े और किसी की हिम्मत नहीं पड़ी शंकर जी त्रिनेत्र से संसार को भस्म कर देने वाले वह भी  09:51 नहीं जा सके आगे नरसिंह के तो सबने कहा प्रहलाद से कि बेटा तुम जाओ तुम्हारे ऊपर तो गुस्सा करेंगे  10:03 नहीं वो तुम्हारे कारण तो आए हैं तो वो छोटे से थे छोटे बच्चे डरते नहीं किसी से देखो आप  10:14 लोग बड़े-बड़े जो है वो हम हमारे स्वरूप से जगतगुरु नाम को सोच कर के डरते हैं दूर से प्रणाम  10:25 करते हैं और छोटे बच्चे चढ़ जाते हैं ऊपर हाथ  10:34 मिलाओ तो प्रहलाद चले गए सीधे डायरेक्ट नरसिंह भगवान ने उठा लिया गोद में चिपटा  10:47 लिया फिर बिठा दिया हां बेटा बर मांगो बरम बण स्वाभि मतम जो तुम्हारी इच्छा  11:02 मा सातव स्कंद के नौवे अध्याय का बावा श्लोक प्रहलाद का माथा ठनका य प्रहलाद जब मां की पेट में  11:16 थे तब नारद जी ने उनको उपदेश दिया था वैराग ज्ञान भक्ति सबका तो सब उनको नॉलेज थी इसलिए उन्होंने  11:32 सोचा ये क्या कह रहे हैं  11:38 मांगो इसका मतलब या तो मेरे अंदर कोई कामना होगी अया तो यह गुस्से में है कुछ नॉर्मल नहीं  11:52 है दो में एक कारण  11:58 है क्या करना है हमको अपन चुप रहो अरे मैं कह रहा हूं बेटा भर मांगो सब मांगते  12:09 हैं तो प्रहलाद ने कहा आप तो बोलना पड़ेगा तो प्रहलाद ने कहा यत आशिष आस्ते न सत स बण  12:24 सातवे स्कंद के दव अध्याय का चौथा श्लोक  12:31 महाराज जो अपने स्वामी से कुछ मांगता है वो तो बनिया है व्यापारी है बिजनेसमैन  12:43 है तो मैं व्यापारी नहीं हूं मैं तो आपका दास हूं तो दास का काम है स्वामी की सेवा करना  12:51 कि स्वामी से  12:58 मांगना ससंग भगवान मुस्कुराए बड़ी योग्यता है बड़ा ज्ञान छाट रहा है चरा सा चो कर हा हा ठीक है  13:09 ठीक है फिर भी सब मांगते हैं बेटा तुम भी  13:16 मांगो फिर कहा तो प्रहलाद कहता है और जवाब कड़ा देना पड़ेगा तो प्रहलाद ने कहा अहम तो काम भक्त  13:30 स्वान पा श्रय मैं आपका दास हूं आप मेरे स्वामी है सुना हां हां य तो मालूम है तो देखिए  13:45 मैं ऐसा दास हूं जो कोई कामना नहीं रखता आपकी सेवा करना चाहता हूं और आप भी हमसे कुछ नहीं  13:58 चा क्योंकि आप भगवान है परिपूर्ण है अरे कोई जीव क्या देगा भगवान को उसके पास है क्या शरीर गंदा  14:11 मन गंदा बुद्धि माश अल्लाह सब गड़बड़ तो है उसके पास भगवान को क्या देगा वो भगवान के काम की  14:19 तो कोई चीज है ही नहीं हमारे पास तो महाराज आपको हमसे कुछ नहीं चाहिए और हमको आपसे कुछ नहीं  14:26 चाहिए फिर ये क्या है मांगा की बात आप बारबार किए जा रहे हैं हां हां ठीक है ठीक है  14:35 बड़ा ज्ञान भग रहा है देख जितने भक्त हुए हैं जब मेरे सामने आते हैं तो सब बर मांगते  14:48 हैं अरे अब तो मांग नहीं पड़ेगा य पीछे ही पड़ गए तो प्रहलाद कहता है कामा नामद रोह भवत  15:01 बण  15:05 बरम सातवे अध्याय के स्कंद के दसवे अध्याय का सातवा श्लोक मैं यह बर मांगता हूं कि आपसे कभी कुछ  15:19 ना मांगू  15:23 हेलो बोलती बंद कर दिया भगवान की अब तो बर देना प आपको मैं कभी कुछ मांगू ही ना मांगे  15:35 मांगने की प्रवृत्ति ना पैदा हो कभी य गारंटी य बर  15:44 दो नसंग भगवान चुप हो गए और कुछ कह महाराज अच्छा कहो कहो इंद्रिया मन प्राण आत्मा धर्म ति मति  16:01 ह्री श्री तेज मृति सत्यम यस्य नसत जन्मना कामना पैदा हुई तो शरीर मन बुद्धि प्राण धैर्य धर्म लज्जा कांति  16:30 तेज ये सब नष्ट हो जाते हैं महाराज मांगने वाले का मैं ऐसी बीमारी नहीं  16:44 पालता सिर लाया भगवान ने और कह कुछ कहो कहो कर डालो जो कहना चाहो इस साथ में स्कंद के  16:59 दव अध्याय का आठवा श्लोक था अब अंतिम बात कह रहे हैं प्रहलाद विमु चत यदा कामा मानवो मन स्थिता  17:11 तव पुंडरीकाक्ष भगवत वाय कल्प सातवे स्कंद के दसव अध्याय का नौवा श्लोक महाराज अगर कोई व्यक्ति अपनी सब कामनाओं  17:28 को छोड़ दे तो आपके बराबर हो जाए हो आपके बराबर भगवत वाय कल्प वो भगवान के बराबर हो  17:49 जाए अच्छा एक बात बता तू मत मांग कुछ लेकिन मेरी आज्ञा तो मानेगा आ य तो दास का धर्म  18:00 है आज्ञा पालन करना आज्ञा जो देंगे आप वो तो मानना ही है हम नहीं मांगेंगे कुछ अच्छा तो मेरी  18:10 आज्ञा है एक मन्वंतर राज्य कर एक मन  18:24 मनतर 4 लाख 32000 वर्ष का कलयुग इसका दूना द्वापर इसका तिगुना त्रेता इसका चौगुना सतयुग सब मिलाकर के 43  18:43 लाख बज वर्ष का चार युग और 71 बार चार युग बीत जाए इतना बड़ा होता है मन्वंतर यानी हम  18:56 लोगों की उम्र के हिसाब से 30 करोड़ 67 लाख 200 हज वर्ष का एक मन्वंतर इतने दिन राज्य कर  19:11 मेरी आज्ञा ने कहा जब तक कहे हम राज्य करें आप कहिए नरक में रहे जो आप आज्ञा दे दास  19:21 का तो धर्म है स्वामी की आज्ञा का पालन  19:27 करना  19:31 यह भागवत का है और गीता में देख लो अर्जुन से भगवान ने कहा विहाय का मान जस्तर मान कुमान  19:45 चरती निया निर्मम निरह कारा सति मदि गति अर्जुन जो सब कामनाओं को छोड़ देता है शांत हो जाता है  20:01 जैसे भगवान सदा शांत है कोई टेंशन डिप्रेशन वगैरा की बीमारी नहीं  20:21 होती कामनाएं ही समस्त दुखों की जननी है  20:31 तो कामनाए को छोड़ दिया जाए अच्छा छोड़नी है कैसे छोड़ दिया जाए कैसे छोड़ दिया जाए बताओ पहले यह  20:45 बताओ कामना हम करते क्यों हैं कामना का भी कोई रीजन होगा हां एक रीजन है क्या आनंद हमको आनंद  21:03 चाहिए आनंद क्यों चाहिए इसका भी कोई रीजन होगा ना क्यों आनंद पाने का हमारा नेचर है नेचर स्वभाव क्यों  21:21 हम आनंद ब्रह्म के अंश है भगवान का नाम है आनंद आनंदो ब्रह्मे बजाना वेद कहता है उनके अंश है  21:36 इसलिए नेचुरल हम भगवान का आनंद चाहते हैं चाहना पड़ेगा वो चाहे चीटी हो चाहे ब्रह्मा हो कोई हो सबको  21:54 आनंद ही चाहना पड़ेगा चाहता है नास्तिक है आस्तिक है भगवान को गाली देता है क्यों आनंद के लिए आप  22:09 लोग दो विरोधी काम करते हैं बैठे हैं क्यों आनंद के लिए अच्छा बैठे रहो रात भर ऐसा नहीं है  22:22 फिर अरे थक गए खड़े होंगे अच्छा खड़े रहो ऐ नहीं थक गए बैठेंगे अच्छा बैठे रहो नहीं सोएंगे  22:38 विरोधी क्रियाएं कर रहे हैं आप हसते हैं हा कभी रोते हैं हां य विरोधी क्रिया है हा क्यों हंसने  22:50 वाले से पूछो क्यों हंसते हो आनंद के लिए तुम रोते क्यों हो जी दुख के लिए अरे भला कोई  23:00 दुख के लिए रोएगा आनंद के लिए रोते हैं और इतना अधिक दुख हो गया कि वह सहा नहीं जा  23:09 रहा है तो रो के निकाल रहे हैं उसको ताकि आनंद  23:16 मिले सोते हैं आनंद के लिए जागते हैं आनंद के लिए हर चीज आनंद के लिए  23:31 तो आनंद की कामना हमारी जा ही नहीं शक्ति तो तो फिर आनंद कहां है यह हमारी बुद्धि जहां कहेगी  23:47 हम उसी की कामना बनाएंगे बनाना पड़ेगा ये हमारी बुद्धि पर डिपेंड है और एरिया है दो जीव के अलावा  24:01 दो एरिया बचा एक भगवान का एक माया का अगर बुद्धि कहती है कि माया के एरिया में आनंद है  24:12 तुम्हारा वाला तो हम माया के एरिया की कामना बनाएंगे संसार संबंधी करोड़पति बने अरबपति बने मां मिले बाप मिले  24:25 बेटा मिले बीवी मिले पति मिले रसगुल्ला मिले साब संसार मिल जाए हमको तो आनंद मिल जाएगा य गलत फहमी  24:37 हो कुछ हो बुद्धि ने कह दिया यहां है बस मन को वैसे ही करना पड़ेगा इंद्रियों को वैसे वर्क  24:46 करना पड़ेगा अब बुद्धि ने गलती की की तो भोगे सब अरे भाई एक ड्राइवर है और तांगा चलाता है  25:00 व जिधर को घोड़ों को ले जाएगा उधर तांगा जाएगा अब वह शराब पिए है लूल जलूल जगह पर ले  25:10 जा रहा है लड़ा रहा है उसको तो यात्री भोगे पैसेंजर को भोगना पड़ेगा तो उसी प्रकार यह बुद्धि हमारी  25:21 जो है यह ड्राइवर है गवर्नर है ये पूरी मशीन को गव करती है दो एरिया है या तो भगवान  25:33 में आनंद है यह बुद्धि का डिसीजन बनेगा या तो संसार में आनंद है यह बुद्धि का डिसीजन बनेगा अब  25:44 क्योंकि संसार प्रत्यक्ष है और भगवान परोक्ष है व दिखाई नहीं पड़ता उसका आनंद क्या होता है कोई आया नहीं  26:00 कोई महापुरुष भी मिलता है तो हमारी तरह व भी चलता फिरता खाता पीता देखता हंसता रोता है उसको आनंद  26:10 मिल रहा है हम कैसे  26:15 जाने और सब जा रहे हैं इसी साइड में तो सब बेवकूफ है क्या व 10 ब जो बोल रहे  26:23 हैं उधर आनंद है तो ऐसे बात इधर ही होगा सब इधर ही भाग रहे  26:37 हैं देवता लोग भी भाग रहे हैं मनुष्य भी भाग रहा है पशु पक्षी भी भाग रहे हैं तो हमारा  26:48 डिसीजन बुद्धि का यही सदा से रहा कि संसार में सुख है हमको नहीं मिला हमारा बाप खराब है हमारी  26:58 मां खराब है हमारी बीवी खराब है हमारा बेटा खराब है लेकिन संसार में आनंद है और हमको भी एक  27:09 दिन मिलेगा लगे  27:15 रहो रेगिस्तान  27:21 में हवा से बालू उड़ती है ऊपर को तो सूरज की किरण से चमकती है तो हिर समझता है वहां  27:35 पानी है दौड़ता है वहां नहीं है वो आगे है फिर दौड़ता है दौड़ते दौड़ते मर जाता है वहां पानी  27:49 है ही नहीं ऐसे ही हम  27:56 लोग एक के बाद एक के बाद एक चीजें मिलती गई आनंद नहीं मिला कितनी कामनाएं पूरी हो चुकी हमारी  28:10 जब से हम पैदा हुए अरे एक दिन में 10 कामना बनती है पूरी होती है भूख लगी है रसगुल्ला  28:21 मिला आनंद आ गया फिर चला गया आनंद फिर भूख लगी मां को चिपया बाप को चिपटा बीवी को चिपटा  28:35 आनंद मिल गया फिर चला गया आनंद और फिर वो भूख आई ये क्या बीमारी है जी पता नहीं क्या  28:45 है है जरूर एक कोई भयंकर  28:51 बीमारी तो इस प्रकार संसार संबंधी कामना हमने गलती से बुद्धि की गलती से की और उसका परिणाम भोग रहे  29:05 हैं दुख अगर यही कामना भगवान संबंधी कर लेते देखिए कामना बस पाच ही है देखने की कामना सुनने की  29:24 कामना सूंघने की कामना रस लेने की खाने की कामना स्पर्श करने की कामना एक पांच ज्ञानेंद्रियां है सबके पास  29:41 कुत्ते बिल्ली गधे मनुष्य देवता सब के पास यही पांच है यही पांच कामनाओं के लिए इतना बड़ा संसार भगवान  29:53 ने बनाया कि सब बेवकूफ बने रहे इसी में  30:01 कोई इधर कोई उधर कोई उधर सब अलग अलग ढंग से एक घर में चार पांच आदमी है बच्चे हैं  30:13 एक कहता है हमको बैंगन चाहिए एक कहता है टमाटर चाहिए एक कहता है हम तो आलू ही खाएंगे एक  30:23 मां परेशान है किस किस की बात सुने इतना पैसा उसके पास है ही नहीं कि सब बच्चे के अनुसार  30:31 बनावे खाना सबके अलग-अलग संस्कार अलग-अलग रुचि कोई फोटोग्राफर फोटो लिए पहाड़ों में घूम रहा है कोई पिक्चर की ओर  30:45 भाग रहा है कोई पहलवानी कर रहा है कोई पंडित जी बना कथा बाच रहा है सब अलग अलग और  30:56 सब एक दूसरे को बेवकूफ क  31:00 क्या तुम भी वहा दुकान पर दिनरात बैठे रहते हो देखो हम शेयर खरीदते हैं और एकदम अर पति हो  31:08 जाते हैं और जब डाउन हो गया तो क्या हाल है मत  31:20 पूछो 13000 था अब 8000 हो  31:26 गया  31:30 तो ये संसार संबंधी कामना ही दुख का कारण है और भगवान संबंधी यही पांच कामना आनंद से सराबोर कर  31:45 देगा सदा को यानी जैसे माया है ऐसे आपको बना देगी माया जैसे भगवान है ऐसे आप को बना देंगे  31:59 भगवान यानी जिसकी कामना करोगे उसी के समान हो जाओगे यह कामनाओं का रहस्य है बोलिए लाडली लाल की जय