तुमको भगवान् पकड़ेंगे - तुम कभी नहीं गिरोगे | भगवत् प्राप्ति का साधन - 6/6 | Jagadguru Shri Kripaluji
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00:00:01 भगवान को पाने का एकमात्र साधन निष्काम एवं अनन्य भक्ति है, तप या अन्य मार्ग नहीं।
00:01:46 गीता के अनुसार जो भी जीव अनन्य भाव से भगवान की शरण में आता है, उसका कभी पतन नहीं होता।
00:04:33 गीता का परम गोपनीय उपदेश यही है कि अपनी मन और बुद्धि को पूरी तरह भगवान को समर्पित कर दो।
00:05:15 शरणागति स्वीकार करने वाले भक्त के समस्त पापों को भगवान स्वयं नष्ट कर देते हैं।
00:07:41 भगवान से सांसारिक सुख या मुक्ति मांगने के बजाय केवल उनका निष्काम प्रेम मांगना चाहिए।
00:10:41 अन्य देवी-देवताओं के चक्कर छोड़कर केवल राधा-कृष्ण की अनन्य भक्ति और निरंतर स्मरण करना पर्याप्त है।
00:16:41 साधना को कल पर न टालकर तत्काल निष्कपट और सरल बालक बनकर भगवान को पुकारना शुरू कर देना चाहिए।
Full Transcript
00:01 गीता कहती है भक्त तन्यया शक्त एवं विधुन अर्जुन केवल भक्ति से मैं मिलूंगा ना वेद न तपसा न दानेन
00:20 न चेया कोई मार्ग नहीं है मुझे पकड़ने के योग्य केवल भक्ति से मैं हार जाता हूं
00:33 अनन्या तो माम जे परपासते ते नित्याभक्त नाम योगक्षम नौवे अध्याय का 22वा श्लोक अनन्य भक्ति से मैं मिलता हूं
00:51 पत्रम पुष्पम फलम तो जोक्त प्रति तद भक्त प्रत नौवे अध्याय का 26वा श्लोक भक्ति युक्त होकर पत्ता दे दो
01:08 पानी दे दो कुछ ना हो तो मैं ले लूंगा
01:15 अपचे सुदुराचारो भजते मामंद भाग साधु समंत महा पाप किए हो कोई करोड़ों ब्रह्म हत्या घोर दुराचारी और मेरी शरण
01:32 में आ जाए मैं सब क्षमा कर दूंगा नौवे अध्याय का 30वा श्लोक भगवान ने गीता में चैलेंज किया है
01:46 एक जगह एक श्लोक में भवती धर्मत्मा सश निगच्छति कौन ते प्रति जानी नमे भक्त प्रणसति मेरी प्रतिज्ञा है अर्जुन
02:04 मेरे भक्त का पतन नहीं हो सकता मैं ठेका लेता हूं नौव अध्याय का 31वा श्लोक मा पार्थ पाप
02:19 स्त वैथा शद्रा तेज परत कोई हो पुरुष नपुंसक नारी नर कोई जीव हो जो मेरी शरण में आ जाएगा
02:36 मेरी भक्ति कर लेगा बस उसी को मैं मिलता हूं
02:45 अनन्य चेता सततम माम स्मरति नित्यसा तस्या सुलभ पार्थ मैं बड़ा आसान हूं लेकिन भक्ति के द्वारा और किसी मार्ग
02:58 से नहीं 18 अध्याय का लेक्चर हुआ अर्जुन बेमनी से सिर हिलाता गया हम हम
03:12 घुसा नहीं कुछ उसके दिमाग में वो बीम बीमारी बनी है कि इनको मारूंगा इनकी स्त्रियां विधवा होंगी यह पाप
03:23 ये मैं नहीं करता ऐसा राज्य नहीं चाहिए हमको
03:29 भगवान ने छहों दर्शनों का वेदांत न्याय सांख्य मीमांसा सुना दिया भगवान परेशान हो गए 18 अध्याय में भगवान ने
03:45 अंत में कहा सर्व गुतम भूण में परम बचा अर्जुन बस सुन मैं आखरी बात बोल रहा हूं अब मैं
03:59 इसके आगे नहीं बोलूंगा रथ छोड़ के मैं चला जाऊंगा
04:07 अर्जुन होशियार हो गया और देख ये जो मैं बोलने जा रहा हूं ना ये प्राइवेट में प्राइवेट में प्राइवेट
04:15 बात है गुह्य माने प्राइवेट गुहतर माने प्राइवेट में प्राइवेट और गुहतम माने सबसे प्राइवेट और सर्व गुहतम और लगा
04:28 दिया
04:33 18 अध्याय का 64वा श्लोक महाराज क्या है प्राइवेट में प्राइवेट में प्राइवेट बात मन मना मत भक्तो मत जामा
04:46 नमस् गुरु तू अपनी मन बुद्धि मुझको दे दे मैं जो कहूं कर बुद्धि मत लगा ये बार-बार महाराज आप
04:57 यही कहते हैं मन बुद्धि ना लगा ना लगा आखिर पाप होगा नहीं आपने तो वेद में कहा है मा
05:06 हिंसत सर्वा भूतानी एक मक्खी को भी ना मारो पाप है
05:15 भगवान ने कहा अच्छा सुन 18व अध्याय के 66व श्लोक में अंतिम सर्व धर्मान परित्यजमाकम शरणम ब्रज तू सब धर्मों
05:29 को छोड़ के मेरी शरण में आजा तो अहम सर्व पापे मोक्ष्याम जो पाप की तू बात करता है ना
05:41 वो मैं ही तो पाप का दंड देता हूं तो मेरा यह कानून है कि अगर कोई मेरी शरण में
05:50 आ जाता है तो फिर उसको पाप नहीं लगता चाहे समस्त ब्रह्मांड को मार डाले
06:00 क्योंकि मंत्र मेरे पास रहेगा मन ही से तो कर्म माना जाता है ये अंतिम श्लोक सुन के अर्जुन ने
06:11 कहा अरे तो ये पहले ही बता देते महाराज कि हम सब पापों से बरी कर देंगे ये पाप से
06:19 तो मैं डर रहा था तो शरणागति का मतलब है कि मेरे सर्वस्व है श्याम सुंदर ऐसी भक्ति जिसमें कोई
06:36 कामना ना हो ध्यान दीजिए इस point पर हमारे देश में बड़ी भक्ति दिखाई पड़ती है दिखाई पड़ती है और
06:50 मेला लगता है कुंभ है 20 करोड़ आदमी प्रयाग में और चले जा रहे हैं वैष्णो देवी द्वारिका भद्रिका आश्रम
07:10 इनसे पूछो कि ये क्या करते हो क्यों करते हो हां जी ऐसा करने से मरने के बाद बैकुंठ जाएंगे
07:23 बड़े भोले हो भगवान को तुम बेवकूफ बनाना चाहते हो अरे भगवान तो कह रहे हैं वेद से ले रामायण
07:34 तक भक्ति के बिना कुछ नहीं काम देगी चालाकी
07:41 भक्ति से ही काम बनेगा और कोई मार्ग नहीं है कोई कामना लेके मत जाओ अरे दो ही कामना है
07:54 संसार की और संसार से मुक्ति की वो भी खतरनाक कामना है हमको तार दो महाराज हमको तार दो हमको
08:09 तार दो मोक्ष दो ये मुक्ति तो और बड़ी डाकिनी है जिसको लग जाए छोड़े ना भगवान का प्रेम मांगो
08:24 बस और कुछ ना मांगो राधा कृष्ण का प्रेम उनकी सेवा करेंगे उनके प्रेम से देना सीखो लेना बंद करो
08:43 कामना रहित होकर सदा सर्वत्र उनको अपने साथ मानते हुए संसार में कर्म करो तेन तक्त भजी था वेद कहता
08:58 है माध कस सिद्धम कर्म योग करो संसार का कर्म करो फिजिकल मन भगवान में रहे और संसार ना मांगो
09:13 भगवान से
09:16 अरे अगर संसार मांग रहे हो तो यह नहीं सोचा कि भगवान में आनंद है कि संसार में भगवान में
09:26 तो फिर संसार क्यों मांगते हो मिठाई की दुकान पर कोई चप्पल मांगे हैं दो जोड़ी चप्पल बांध दे अरे
09:38 पागल हुआ है चप्पल कोई मिठाई का नाम है क्या नहीं नहीं जो पैर में पहनते हैं अरे तो ये
09:45 मिठाई की दुकान तू अंधा है भगवान से संसार मांगता है और संसार से भगवान मांगेगा अरे ऐसा कैसा है
09:58 भाई अगर संसार ही मांगना है तो भगवान के पास क्यों जाते हो नास्तिक रहो
10:07 तो कोई कामना ना रख के रूप ध्यान करते हुए आंसू बहाकर भगवान से उनका दर्शन मांगो प्रेम मांगो बस
10:22 और कुछ ना मांगो सदा रियलाइज करो हमारे अंदर बैठे हैं और इसी खुशी में मतवाले रहो अनंत कोटि ब्रह्मांड
10:35 नायक भगवान हमारे हृदय में रहते हैं
10:41 और यह भी ध्यान रखो कि तमाम देवी देवताओं के पास ना जाओ पेड़ की जड़ में पानी डालो वह
10:54 डाल उपशाखा पत्र पुष्प फल सबको जल मिल जाएगा अलग-अलग पानी डालने की जरूरत नहीं येतो हर तरपितान जगप रजते
11:11 जंतरा जंगमाप भगवान की भक्ति कर लो सबकी भक्ति हो गई ये भगवान ने मान लिया
11:25 कोई देवी देवता की हिम्मत नहीं है जो आंख उठा के देखे भक्त की ओर अनन्य भक्ति ये मतलब मेरा
11:35 है और हम लोग क्या करते हैं देवी जी को भी देवता को भी वहां भी जा रहे हैं एक
11:45 कब्रिस्तान है वहां भी जा रहे हैं ये क्या कर रहे हो केवल राधा कृष्ण की भक्ति करो और अनन्य
11:57 भक्ति हो और निष्काम भक्ति हो और मन से भक्ति हो बस इतना सा ज्ञान रखो बाकी सब भूल जाओ
12:09 और सब जगह भगवान को रियलाइज करो मंदिर में ही नहीं सब जगह जहां भी जाओ वो हमारे साथ है
12:24 हमारी हर क्रिया को नोट करते हैं यह वेद कह रहा है फथ करो विश्वास करो बार-बार बार-बार चिंतन के
12:34 द्वारा दृढ़ करो तो अंतःकरण की शुद्धि होगी अंतःकरण की शुद्धि करना ही बस मनुष्य का अंतिम कर्म है इसके
12:51 आगे हमारा कोई काम नहीं हमारी छुट्टी अब गुरु और भगवान करेंगे आगे क्या करेंगे वो हमारी इंद्रिय मन बुद्धि
13:02 को दिव्य बनाएंगे और दिव्य ज्ञान दिव्य प्रेम दिव्य आनंद दिव्य भगवत दर्शन ये सब कराएंगे वो
13:16 फिर वो माया भागेगी त्रिगुण भागेंगे तीनों कर्म भस्म हो जाएंगे पंच कक्लेश समाप्त हो जाएंगे पंचकोष जल जाएंगे और
13:31 हम सदा के लिए सदा पश्यंतु सूर त विष्णु परम पदम सोते सर्मान सह ब्रहणा विपश्चिता वेद मंत्र के अनुसार
13:46 सदा के लिए भगवान के लोक में आनंदमय रहेंगे और जब भगवान आज्ञा करेंगे जाओ मृत्यु लोक में और जीवो
13:56 को लाओ हमारे पास तो हम आएंगे लेकिन हमारे ऊपर माया का अधिकार नहीं हो सकता हम माया के ऊपर
14:07 शासन करते हुए संसार में रहेंगे और फिर भगवान के धाम को चले जाएंगे ये सब बातें आगे की हैं
14:16 हां नष्ट उपासी कल करेंगे कल करेंगे यह मत छोड़ो मत बोलो मत सोचो अभी करो तुरंत करो एक छोटा
14:34 सा कथानक बताएं एक बार युधिष्ठिर के राज्य में एक ब्राह्मण आया और उसने कहा कि लड़की की शादी है
14:45 10 तोला सोना दे दो तो युधिष्ठिर ने कहा भाई आज जड़ा मैं बहुत व्यस्त हूं कल आना भीमसेन खड़े
14:56 थे उनको बड़ा बुरा लगा कि कल क्यों कहा इन्होंने हमसे कह देते कि भीम जाओ दिला दो सोना भीमसेन
15:08 ने मजाक किया उन्होंने प्राइम मिनिस्टर को बुलाया और कहा आज खुशी मनाओ सारे शहर में बहुत बड़ी चीज हुई
15:17 है आप प्राइम मिनिस्टर को क्या राजा का आर्डर हो गया उसके भाई कह रहे हैं होने लगी खुशी की
15:29 बातें आतिशबाजी वगैरह युधिष्ठिर ने कहा भाई आज क्या है ना जन्माष्टमी है ना रामनवमी है बात क्या है प्राइम
15:39 मिनिस्टर को बुलाया उन्होंने कहा साहब आपके भाई साहब ने कहा भीमसेन को बुलाया क्यों भाई क्या बात है उन्होंने
15:47 कहा भैया आज तो जो आज तक नहीं हुआ वो हो गया अरे क्या हो गया बोल ना भैया भैया
15:57 आपने काल को जीत लिया मैंने काल को जीत लिया क्या हुआ है तुझको पागल तो नहीं हो गया अरे
16:07 भैया आपने कहा ना उस ब्राह्मण से कल आना इसका मतलब आपके पास पक्का ये लिखा पढ़ी का हिसाब है
16:16 कि कल तक हम रहेंगे अरे हां है मोटा लेकिन अकल पतली है इसकी तो उन्होंने कहा बुलाओ बुलाओ उस
16:28 ब्राह्मण को हम क्षमा मांगेंगे उससे तो उद्धार नहीं करो उद्धार करते करते तो अनंत जन्म बीत गए
16:41 इसलिए साधना तत्काल प्रारंभ कर देना है और उसमें कुछ नियम कायदा कानून नहीं है कहां बैठे नहा के करें
16:52 कैसे करें बस प्यार करना है तुमने बचपन से मां से प्यार किया बाप से प्यार किया कोई नहा धो
17:03 के किया सब जगह मन से स्मरण करना बस मन से स्मरण करना
17:15 आलो सर्व शास्त्र विचार पुनः पुनः सुनष्पन धो नारायणो हरि वेदभ्यास ने स्कंद पुराण में कहा कि हमने सब शास्त्रों
17:31 वेदों का मंथन किया और एक निष्कर्ष निकाला है भगवान का निरंतर स्मरण करो और कुछ नहीं ब्रह्मा कहता है
17:45 भगवान ब्रह्म कारने त्रिक्ष मनीषया तवसत कुटो अतिरात्मन यथा भवेत मैंने तीन बार वेदों को मथा है ब्रह्मा कह रहा
18:01 है और एक निर्णय निकाला है राधा कृष्ण की भक्ति करो मन से और तमाम ज्ञान भूल जाओ ऐसे वैसे
18:16 तरकीब तिकड़म छल कपट ये सब कुछ नहीं भोले भोले बालक बनकर जैसे पैदा हुए थे वैसे ही फिर बन
18:28 जाओ और भोले बालक बनकर भगवान के आगे रोकर पुकारो बस यही शास्त्र वेद का सार है इसके आगे कोई
18:40 कुछ बोले कृपालु के पास ले आओ लाडली लाल की