First the Gist in Hindi with timestamps, thereafter Full Transcript is given
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00:03:00 प्रवचन की शुरुआत हरि नाम संकीर्तन और गुरु तत्व की महिमा का परिचय देकर की गई है।
00:06:44 वेदव्यास जी के कथनानुसार गुरु से परे कोई तत्व नहीं है, जबकि वेदों में परब्रह्म श्री कृष्ण को ही सर्वोत्तम बताया गया है।
00:08:22 उपनिषदों के अनुसार सृष्टि में ब्रह्म, जीव और माया—ये तीन अनादि, अनंत एवं शाश्वत तत्व विद्यमान हैं।
00:12:44 भगवान श्री कृष्ण की माया से मुक्ति केवल उनकी और गुरु की शरणागति एवं कृपा से ही संभव है।
00:14:17 ब्रह्म का वास्तविक स्वरूप 'आनंद' है और प्रत्येक जीवात्मा उसी आनंद का अंश होने के कारण सदैव केवल सुख की ही खोज करती है।
00:19:36 तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार जब तक जीवात्मा उस परम आनंद (ईश्वर) को प्राप्त नहीं कर लेती, तब तक उसे वास्तविक सुख नहीं मिल सकता।
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Full Transcript :
00:00:01 के 00:00:05 धरपण मारजनम 00:00:13 भव महा 00:00:17 दावा 00:00:21 अग्नि निर्वापणम 00:00:29 श्रेय कव चंद्रिका वितरणम 00:00:40 विद्या बधु जीवनम 00:00:52 आंदा 00:00:58 बुद्धि वर्धनम प्रतिपदम 00:01:05 पूर्णता 00:01:10 स्वाधनम 00:01:16 सर्वात्मपनम 00:01:20 परम विजयते 00:01:26 श्री कृष्ण संकीर्तनम 00:01:38 नमः कमलना 00:01:54 नमः कमल माने 00:02:05 नमः कमल पाय 00:02:16 नमस्ते कमले क्षण यो ब्रह्माम विधा पूर्वम जो वेदा प्रहणो तस्मै त देवात्म बुद्ध प्रकाशम मुमुक्षुर शरणमह प्रपदे 00:02:42 वृंदारक वृंद बंद आनंद कंद सच्चिदानंद श्री कृष्ण चंद्र चरणारविंद मकरंद मिलिंद महानुभाव थोड़ी देर हरि नाम संकीर्तन कर लीजिए 00:02:57 पश्चात 00:03:00 गुरु तत्व पर कुछ प्रकाश डाला जाएगा भजो गिरधर 00:03:10 गोविंद गोपाला 00:03:21 गोविंद गोपाल 00:03:29 जो गिरधर 00:03:34 गोविंद गोपाला 00:03:45 गोविंद गोपाला 00:03:53 भज 00:03:58 गोविंद गोपाला 00:04:08 गोविंद गोपाल 00:04:16 भजो गिरधर गोविंद गोपाला 00:04:32 गोविंद गोपाल 00:04:39 भज गिरध 00:04:43 गोविंद गोपाला 00:04:53 गोविंद गोपाला 00:04:59 भज गिरिधर 00:05:04 गोविंद गोपाला 00:05:13 गोविंद गोपाला 00:05:19 बोलिए वृषभान नंदिनी राधा रानी की जय 00:05:27 अब आप लोग सावधान हो हो जाए आप लोग इसी आशा से आए होंगे कि गुरु तत्व पर कुछ प्रकाश 00:05:38 डाला जाएगा 00:05:43 किंतु गुरु तत्व पर प्रकाश डालने की सामर्थ्य केवल श्रोतय ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष के पास ही है और कोई गुरु तत्व 00:06:01 पर प्रकाश नहीं डाल सकता फिर भी जब आप लोगों की इच्छा है तो हमको सेवा करना है कुछ ऐणा 00:06:12 बहणा जो कुछ होगा आपके सामने प्रस्तुत करेंगे 00:06:20 सबसे बड़ी अथॉरिटी वेदभ्यास है वेद के ज्ञाता 00:06:30 और 4 लाख श्लोक के रचयिता वेदांत के रचयिता गीता के रचयिता 18 पुराण के रचयिता उन वेदव्यास ने कहा 00:06:44 है नास्त तत्वम गुरु परम बड़ा भयानक वाक्य है गुरु से परे कोई तत्व नहीं 00:07:00 अब कोई ऐसे कैसे कह दे कि वेदव्यास भांग पी के ले गए होंगे अरे भगवान के अवतार हैं वेदव्यास 00:07:13 थोड़ा विचार करें इस पर ऐसा क्यों लिखा क्यों इसलिए कि समस्त वेद उपनिषद कहते हैं कि परात पर तो 00:07:24 ब्रह्म है श्री कृष्ण उससे परे और कोई नहीं है देखो वेद कह रहा है कि तीन तत्व हैं संजुक्त 00:07:37 में ततक्षर व्यक्तम भरते विश्व अनीष्यात्मा बते भोक्त भावा ज्ञात्वा देवम मुते सर्वपाश श्वेताकरोपनिषद कृष्ण यजुर्वेदीय शाखा का यह उपनिषद 00:08:01 है 00:08:04 यह पहले अध्याय का आठवां मंत्र है अर्थात तीन तत्व हैं एक वो एक मैं एक ये वह माने ब्रह्म 00:08:22 भगवान परमात्मा अनेक नाम और मैं माने जीव आत्मा और यह माने माया ये तीन तत्व अनाद अनंत शाश्वत हैं 00:08:40 इन तीनों में किसी ने किसी को बनाया नहीं और कोई किसी का नाश नहीं कर सकता 00:08:49 कहने को तो माया जड़ है लेकिन है अनाध्य अनंत भगवान उसको समाप्त नहीं कर सकते अगर कर सकते होते 00:09:03 तो हम सब लोगों का क्या सौभाग्य होता आनंदमय हो जाते 00:09:11 तो यह तीन तत्व अनादि है इसके आगे फिर कहा श्वेतापनिषद ने ज्ञजा भीष भजा हेका भोक्त भोग्यार्थ युक्त अनंतत्मा 00:09:30 विश्व रूप्ता त्रयं जदा ब्रह्म में तत ये श्वतापनिषद का पहले अध्याय का नौवा मंत्र है इसमें कहा एक ज्ञ 00:09:46 है ज्ञ माने सर्वज्ञ और एक अज्ञ है सर्वज्ञ भगवान और अज्ञ जीव और एक माया है वो जड़ है 00:10:03 ये जीव उसका उपभोग करती है जीवात्मा उस माया का उपभोग करती है यानी संसार का भगवान नहीं करते वह 00:10:16 दृष्टा है देखते रहते हैं और जीवात्मा भोगता है और आगे चलिए क्षरम प्रधानमता क्षरम हर क्षरात्मते देव एक तस्याना 00:10:34 जो तत्व भावात भूते विश्व माया निवत्त ये भी श्वेता उपनिषद का मंत्र है पहले अध्याय का दवां मंत्र यह 00:10:49 भी कहता है एक क्षर है माया प्रधान भी कहते हैं उसको और अमृताक्षरम हर और अमृत अक्षर जो है 00:11:00 वो जीव है 00:11:04 और इन दोनों का जो शासक है गवर्नर नियामक वह भगवान है तीसरा तत्व और आगे स्पष्ट किया एतम नित्यवा 00:11:21 संस्थ ना परम वेदव्यम कििंचित भोक्ता भोग्यम प्रेरित्वा सर्वम प्रोक्तम त्रिविध ब्रह्म में तत ये श्वेतापनिषद का है ये पहले 00:11:38 अध्याय का 12वा मंत्र है इसमें कहते हैं देखो भाई बस तीन तत्व को जान लो और कुछ जानना नहीं 00:11:49 वही तीन तत्व ब्रह्म जीव माया तीनों को ब्रह्म कहा वेद ने त्रिविध ब्रह्म में तत ये तीन प्रकार का 00:12:02 ब्रह्म है अनादि है शाश्वत है कहने को तो माया जड़ है और बहुत से तो सर फिरों ने कहा 00:12:11 है मिथ्या है यहां तक कह दिया है लेकिन दवी हे गुणमई मम माया दुरतया मामेव ये प्रपद्यते माया मेंता 00:12:27 तरते गीता सातव अध्याय का 14वा श्लोक ये मेरी दैवी माया मेरी माया है मेरी ध्यान मेरी माया है बिना 00:12:44 मेरी शरणागति के बिना मेरी कृपा के कोई भी योगी ऋषि मुनि तपस्वी माया से उत्तीर्ण नहीं हो सकता स्वर्ण 00:12:58 अक्षरों में लिख लो कोई हो ब्रह्मा विष्णु शंकर भी क्यों ना हो बिना मेरी शरणागति और मेरी कृपा के 00:13:12 ना माया निवृत्ति होगी ना मुझको कोई जान सकता है ना मुझको कोई पा सकता है 00:13:22 तो तीन तत्व है इन्हीं को जान लेना है बस इतनी सी बात है और इन तीन में दो तत्व 00:13:31 ऐसे हैं जो शास्त्र है और एक तत्व है शासक नियामक भगवान जीव और माया पर नियामन करते हैं शासन 00:13:45 करते हैं 00:13:49 क्यों जी इन तीनों को जानने से लाभ क्या है क्यों जाने हम इन तीनों को तो वेद ने कहा 00:14:02 आनंदो ब्रह्मानात आनंदा देव खलमान भूतानी जायंते आनंद जातानी जीवती आनंदम प्रयंतम विषती वो जो है वो जिसको हम कह 00:14:17 रहे हैं ब्रह्म भगवान परमात्मा उसका एक खास नाम है आनंद पर्यायवाची है वो आनंद कहो चाहे भगवान कहो चाहे 00:14:28 परमात्मा कहो गॉड कहो कुछ कहो उस सुप्रीम पावर का नाम है आनंद बस तो हम उसके अंश हैं इसलिए 00:14:42 नेचुरल आनंद चाहते हैं विश्व में भले ही हजारों मत चल रहे हैं आस्तिकों के भी नास्तिकों के भी भौतिकवादियों 00:14:56 के भी अध्यात्मवादियों के भी लेकिन इसमें दो मत नहीं है कि हम आनंद नहीं चाहते ऐसा कोई कहने को 00:15:08 तैयार नहीं क्यों देखो किसी दो व्यक्ति की शक्ल नहीं मिलती अकल क्या मिलेगी अंगूठा छाप नहीं मिलता लेकिन इस 00:15:21 मामले में एक चींटी से ले ब्रह्मा तक सब एक रहा है आनंद चाहिए सुखम में भूयात दुखम में माभूत 00:15:32 हमको सुख मिले दुख ना मिले और प्रैक्टिकल रूप से भी जब हम मां के पेट से नीचे गिरे तो 00:15:43 पहला काम क्या किया नारा लगाया नारा हां रोए रोने का अभिप्राय क्या भले ही मां विभोर रो रही है 00:15:57 हां जिंदा है बच्चा बड़ा अच्छा हुआ लेकिन बच्चे को क्या दुख मिल रहा है पैदा होने का जो कष्ट 00:16:07 मिल रहा है उसको निकाल कर रोकर निकाल रहा है और यह कह रहा है कि मुझे दुख नहीं चाहिए 00:16:17 ये क्या मुसीबत संसार में आने आते ही मुसीबत दुख दबाव में दुख होता है वो दुख भूल गए होंगे 00:16:27 आप लोग बहुत बड़ा दुख होता है लेकिन मां खुशी मनाती है बाप खुशी मनाता है और तमाम प्रकार के 00:16:37 ढोल बजते हैं बच्चा रोता रहे तो हमने पैदा होते ही यह बताया संसार को कि हमको आनंद चाहिए दुख 00:16:51 नहीं चाहिए तब से पूरी लाइफ आनंद आनंद कैसे मिले किसी ने कहा ऐसे हो ऐसे मिल जाएगा उधर गए 00:17:03 नहीं मिला इन कहा अरे वो बेवकूफ है इधर आओ इधर गए नहीं मिला सब जगह चप्पल जूते मिले दुख 00:17:11 मिला अशांति मिली अतृप्ति मिली अपूर्णता मिली बड़ी-बड़ी पोस्ट पर गए प्राइम मिनिस्टर हो गए बड़े-बड़े पैसे कमाने में गेट 00:17:24 वगैरह हो गए लेकिन अंदर अशांति टेंशन नींद की गोली खा के तो नींद आती है 00:17:37 लेकिन हम भाग रहे हैं उसी तरफ देख लो इसके पास 10 कार है 10 कोठी है तो अगर मेरे 00:17:45 हो जाए तो तो क्या होगा इससे जरा पूछ लो क्यों भाई तुम्हारा क्या हाल है अरे पहले पूछ लो 00:17:53 इसकी जल्दी क्या है भागने की नो नो दिख रहा है क्या पूछे अजी सुख दिखता नहीं है वो तो 00:18:02 रियलाइज किया जाता है फीलिंग में आता है इसकी क्या फीलिंग है ये तुम देख कर नहीं जान सकते ये 00:18:10 तो आदत है सबकी कहो भाई क्या हाल है ऑल राइट एक भी राइट नहीं है सब रॉन्ग है और 00:18:18 बकबक करता है ऑल राइट सभ्यता है ऐसा बोलने की बोल दिया किसी से हाथ मिलाया मुस्कुरा दिया माने सब 00:18:29 ठीक है तो हम केवल आनंद चाहते हैं क्यों हो क्यों ये सब एक मत क्यों है इसलिए कि हम 00:18:41 भगवान के आनंद के अंश है 00:18:47 ये वेद कह रहा है आनंद ब्रह्मजाना 00:18:57 रसो वैसा ये उपनिषद कह रहा है तैत उपनिषद दूसरी बल्ली का सातवां मंत्र है ये रसोव स बड़ा इंपॉर्टेंट 00:19:13 मंत्र है रसो वैसा आनंद वो है उसमें तुम्हें आनंद है नहीं कह रहा है वेद रसो व स नहीं 00:19:23 तो कहता रसो व तस्मिन ऐसा नहीं कहा वह रस है वह आनंद है और रसग्वम हेवयं उसको प्राप्त करके 00:19:36 ही लगा दिया एव अम ये जीवात्मा आनंदमय हो सकता है बस एक उपाय है 00:19:51 और फिर वेद यह भी कहता है कि देखो भाई वो जो ब्रह्म है उससे परे कुछ नहीं है यस्मात 00:20:04 परम ना परमस्त कििंचित यस्म नाणियों नजयोस्त कश्चित श्वेता शतरोपनिषद के तीसरे अध्याय का नौवा मंत्र है 00:20:24 कोई पर तत्व इसके आगे नहीं है गुरु कहां से आठ अफक पड़ा वेद कह रहा है कि उससे परे 00:20:30 कोई तत्व नहीं अरे गीता तो आप लोगों ने पढ़ी होगी मत परम्य किंचित धनंजय अर्जुन मुझसे परे कुछ नहीं 00:20:42 है सातवें अध्याय का सातवां मंत्र श्लोक तो भगवान से परे कोई तत्व नहीं है फिर ने