Saturday, August 8, 2026

6 Questions Answered -DBS#004 by Vrindavan Chandra Das

6 questions answered 

https://www.youtube.com/watch?v=EEydWY-dzVI "6 Questions Answered -DBS#004"  [00:22] प्रश्न 1: दिग्विजय जी का प्रश्न (दीक्षा गुरु और दीक्षा का महत्व) [00:22] "I have 2 questions prabhuji. 1- I want to know more about Diksha Guru? 2- Can I go back to godhead without Initiation?" (दीक्षा लिए बगैर क्या मैं भगवद्धाम वापस जा सकता हूँ?) [00:39] तो पहला प्रश्न मैंने इनसे पूछा था कि आप दीक्षा गुरु के बारे में... इन्होंने लिखा था "I want to know more". तो मैंने प्रश्न लिखा कि आप कितना जानते हो? क्योंकि मुझे रिपीट न करना पड़े, है ना? [00:50] तो मैंने इनको प्रश्न किया तो इन्होंने उत्तर दिया था— "मैं यह जानता हूँ, जो मैंने सुना है, मैंने यह पढ़ा है कि दीक्षा गुरु जो है, वह तुम्हें इस जन्म-मृत्यु के चक्कर से निकालता है, तुम्हारे पाप कर्म ले लेता है।" [01:02] तो ही इज़ एब्सोल्यूटली राइट (He is absolutely right)। कि दीक्षा गुरु क्या करता है? हमारे को जन्म-मृत्यु के चक्कर से निकालता है। हम अपने आप कभी नहीं निकल सकते। हमें हर हेल्प चाहिए, हर किस पर? स्टेप पर। हमें हर स्टेप पर क्या चाहिए? हेल्प चाहिए। [01:24] तो दीक्षा गुरु का इन्होंने पूछा... मोर जानने का मतलब यह है कि दीक्षा शब्द, दीक्षा शब्द दो शब्दों से बना है— 'दी' और 'क्षा'। [01:37] 'दी' का मतलब होता है— दिव्य ज्ञान। 'क्षा' का मतलब— जो दिव्य ज्ञान लेने से जिसके पाप कर्म क्षय (खत्म) हो जाते हैं। [01:46] दिव्य ज्ञान लेने से क्या होते हैं? पाप कर्म क्षय हो जाते हैं यानी खत्म हो जाते हैं। तो वह व्यक्ति है जो कि आपको दिव्य ज्ञान देता है, जिससे कि आपके पाप कर्म क्षय होते हैं। [01:58] जैसे डॉक्टर... कि यार डॉक्टर के हाथ में पता नहीं क्या शिफा है! यह जो गोली देता है उससे काम हो जाता है। तो एक्चुअली डॉक्टर सही कर रहा है कि गोली सही कर रही है? दोनों। क्योंकि डॉक्टर सही गोली प्रिस्क्राइब कर रहा है जिसके कारण तुम्हारी बीमारी दूर हो रही है। [02:14] इसी तरीके से दीक्षा गुरु आपको दिव्य ज्ञान दे रहा है। क्या दे रहा है? दिव्य ज्ञान दे रहा है। जिससे कि आपके पापों का क्षय, मतलब पाप खत्म हो रहे हैं। He is giving you transcendental knowledge. [02:30] सो गोली विदाउट डॉक्टर एंड डॉक्टर विदाउट गोली... बंदूक एंड द बुलेट। बंदूक है, नो बुलेट— डरा सकता है थोड़ी देर के लिए, फिर जब दबाएगा तो कुछ निकलेगा नहीं तो फिर तुझे दबाएगा वह, है ना? और गोली लेके कहेगा मार दूंगा... (हँसते हुए) उससे नहीं। [02:59] तो इसी तरीके से गुरु इज़ लाइक बंदूक एंड दिव्य ज्ञान इज़ लाइक गोली। नाउ द गुरु नोज़ किधर मारना है। अगर किसी को पकड़ना हो तो उसके दिल में नहीं मारते गोली, पैर में मारते हैं पकड़ने के लिए। यहाँ मार दी तो क्या होगा? मर जाएगा। [03:18] तो इसीलिए गुरु भी दवाई देख-देख के देता है कि पहला अभी इतनी दवाई दो, क्योंकि यह बहुत बीमार रहा है। इसको बहुत स्ट्रॉन्ग डोज इमीडिएटली दे दी तो हो सकता है पेट के अंदर अल्सर्स हो जाएँ। तो इसको सब चेक करना पड़ता है कि कैसे इसको मैं वह दूँ। तो गुरु यह सब चीजें देखकर वह देता है। [03:39] सो दीक्षा का अर्थ, शब्द का मतलब यह है। 'गुरु' शब्द का अर्थ है— जो ज्ञान से भारी है। गु-रु— जो ज्ञान से भारी है। He has a lot of weight. बट वेट ऑफ वॉट? बोले साहब, मेरे गुरु तो बड़े श्रेष्ठ हैं, बोले क्यों? बोले साहब, 230 किलो के हैं! (हँसते हुए) वह वेट नहीं... Weight of knowledge! [04:11] गुरु मीन्स heavy with knowledge. गुरु का दूसरा मतलब है— जो 'गु' से 'रु' यानी अंधकार से उजाले की तरफ ले जाए। [04:27] तो दीक्षा गुरु आपका क्या करता है कि बेसिकली आपको बेसिक 'सम्बन्ध ज्ञान' देता है। और डिटेल में जाना चाहें तो सम्बन्ध ज्ञान का मतलब कि— मैं कौन हूँ? यह प्रकृति क्या है? इन दोनों का मालिक कौन है? और इन तीनों का आपस में सम्बन्ध क्या है? यह किसका काम है? दीक्षा गुरु का। [04:45] और यह आपको, आपके पापों को हरता है। पापों को क्यों हरा जाता है? जैसे अभी आपको कोई स्टोरी आती हो ठीक है, I ask you some story and you know the story. परंतु I keep 500 kgs of weight on your head and I tell you keep walking and telling me the story. बोले वेट संभालूँगा कि तेरे को स्टोरी सुनाऊँगा? [05:07] तो इसी तरीके से दीक्षा के समय के अंदर दीक्षा गुरु जो हैं, वह आपके पाप कर्मों को ले लेते हैं जिससे कि आप भक्ति कर सको। इसलिए पाप कर्मों को लेना बहुत जरूरी हो जाता है, उसके बगैर आप भक्ति नहीं कर पाओगे। 500 kg का क्या रख रखा है आपने? वेट रख रखा है और स्टोरी सुना रहे हैं। You are all qualified to do bhakti, because that is the only one thing which is your qualification, rest are all disqualifications. [05:43] तो यह दीक्षा गुरु का कार्य है। अब आता है कि— "Can we go back to Godhead without Diksha?" No! [05:52] दीक्षा के समय तो नाम भी बदला जाता है। क्योंकि दीक्षा के समय में कहा गया है कि आपका दोबारा जन्म होता है। मनुष्य के दो जन्म होने चाहिए मिनिमम (होने तो तीन चाहिए, तीसरा संन्यास पर)। दो जन्म तो अनिवार्य हैं— दूसरा जन्म होता है दीक्षा के समय। [06:15] उस जन्म के अंदर आप अपना पुराना पहनावा छोड़ के नए पहनावे में आते हो। You become from a normal person to a devotee. इसीलिए आपका असली नाम आपको दिया जाता है। असली नाम का मतलब यह है कि हम सब के सब भगवान के दास हैं, तो भगवान के नाम के सामने 'दास' लगाया जाता है और माताओं के लिए 'दासी' लगाया जाता है। [06:39] जैसे मेरी वाइफ हैं, इनका नाम है विष्णुप्रिया दासी। विष्णुप्रिया यानी लक्ष्मी जी, विष्णु जी की प्रिय। या चैतन्य महाप्रभु की वाइफ विष्णुप्रिया। [07:11] जैसे नाम दिया गया अकाम भक्तिदास— यानी जिसे कोई कामना नहीं है भक्ति करने के लिए, उनके दास हैं। तो जितने भी अकाम भक्ति करते हुए आए हैं (प्रह्लाद महाराज, ध्रुव महाराज, समस्त गोपियाँ, राधारानी), उनके दास हुए। मेरे को नाम दिया जैसे वृंदावन चंद्र दास। [07:42] क्योंकि दोबारा बर्थ माना जाएगा ना। फर्स्ट बर्थ तो हर योनि में होता है— कुत्ते का भी बच्चा पैदा होता है, चूहे का भी होता है, सबका होता है। तो फिर हममें और उनमें क्या फर्क है? कोई फर्क ही नहीं रहा! तो इसीलिए कहा गया दूसरा जन्म। दूसरा जन्म जो है, नाम चेंज होता है। [08:06] तो प्रभुपाद जी ने फिर कहा कि जब मैं फिजिकली प्रेजेंट नहीं होऊँगा, परंतु मैं प्रेजेंट हूँ अनमैनिफेस्ट फॉर्म में। कैसे? दिखता नहीं हूँ तुम्हें परंतु मैं हूँ। उस केस के अंदर मेरे सीनियर डिसाइपल जो होंगे, वह दूसरों को क्या करेंगे? दीक्षा देंगे मेरे बिहाफ पर। उनको 'ऋत्विक' कहा जाएगा (Priest)। [08:39] परंतु वह सीनियर विल एक्ट एज 'शिक्षा गुरु'। शिक्षा गुरु का मतलब— अब जो तुम्हें कुछ पूछना है जीवन भक्ति में कैसे चलाना है, क्या करना है, वह तुम उससे लोगे। उससे मतलब वही नहीं जिसने नाम दिया है, कोई भी हो सकता है। परंतु एक सीनियर डिसाइपल को जिसको तुम सोचते हो कि यह मुझे फिलॉसफी समझा सकता है, मेरे जीवन में भक्ति में गाइड कर सकता है, उसको आप शिक्षा गुरु मानकर उसकी आज्ञा का पालन करोगे। [09:05] शास्त्र कहते हैं दीक्षा और शिक्षा गुरु में कोई भेद नहीं है, इसलिए दीक्षा लेना तो अनिवार्य है। [09:11] तो हमारे यहाँ GIVE के अंदर हम सिस्टम यह फॉलो करते हैं जो प्रभुपाद जी ने बोला था करने के लिए। जहाँ किसी से पूछोगे— आप किसके शिष्य हो? "मैं प्रभुपाद जी का दीक्षा शिष्य हूँ। दीक्षित किससे हूँ मैं? प्रभुपाद जी से। हाँ, शिक्षा किससे ले पा रहा हूँ? वृंदावन चंद्र दास प्रभु के अंडर में, तो वह मेरे शिक्षा गुरु हैं।" [09:34] शास्त्रों में कहा गया शिक्षा गुरु और दीक्षा गुरु में भेद करने वाला नर्क जाता है। क्योंकि शिक्षा गुरु आपको भक्ति दे रहा है, बता रहा है कि भक्ति कैसे करनी है। [09:48] तो दीक्षा गुरु दीक्षा के अंदर फेथ (श्रद्धा) पैदा करता है। शिक्षा गुरु का क्या काम है? मेरा काम क्या है कि आपको प्रभुपाद और प्रभुपाद की टीचिंग्स के अंदर फेथ पैदा करूँ। इसीलिए दीक्षा लेना अनिवार्य है। आप मन से नहीं कह सकते कि मैंने प्रभुपाद जी को गुरु मान लिया। अगर ऐसा होता तो शास्त्र कहते दीक्षा की जरूरत नहीं है, आप मन से मान लो। परंतु शास्त्रों ने कहीं भी ऐसा नहीं कहा। शास्त्रों ने कहा है फॉर्मली इनिशिएट (दीक्षा) होनी चाहिए। [10:38] दीक्षा बहुत इम्पोर्टेंट चीज़ है। रूप गोस्वामी जी ने भी कहा है कि दीक्षा लेने पर ही आप भक्ति करने के योग्य बनते हैं। भक्ति रसामृत सिंधु में जो 64 अंग बताए गए हैं, उसमें पहला अंग है— 'गुरु पद आश्रय', फिर तीसरे में आता है— दीक्षा लेना। तो दीक्षा लेना अनिवार्य है। [11:04] प्रश्न 2: अनुज प्रभु / हर्ष का प्रश्न (भगवद्गीता का ज्ञान एवं अर्जुन के श्लोक) [11:04] दूसरा है अनुज प्रभु— "Hare krishna prabhu ji, gita was written by Vedvyas, I agree he knows bhagvat gita but how he knows the shalokas spoken by arjuna or sanjay. U said this knowledge is coming from guru parampara from infinite years, then it must be same from infinite years but arjun was born 5000 year before and his shalok is also there in gita which shows this is not same before arjun birth ? Please explain..." [12:35] यह बोलना चाह रहे हैं यहाँ कि भगवद्गीता तो अनंत काल से चली आ रही है, जैसे भगवान ने गीता में कहा कि यह ज्ञान मैंने विवस्वान को दिया। परंतु उस टाइम अर्जुन तो थे नहीं, अर्जुन तो 5000 साल पहले आए हैं। तो उन्होंने जो प्रश्न किए हैं, तो वह फिर सेम गीता कैसे हुई जो लाखों साल पहले थी? [12:59] बड़ा सिंपल उत्तर है। क्योंकि भगवद्गीता में मतलब किससे है? जो ज्ञान है। ज्ञान तो सेम है! क्वेश्चन आप कैसे भी करो, ज्ञान आपको सेम मिलेगा। [13:18] मैंने बच्चों के साथ एक एग्जांपल किया था कि— • 7 - 6 कितना होता है? 1 • 5 - 4 कितना होता है? 1 • 10 - 9 कितना होता है? 1 • 8 - 7 कितना होता है? 1 • 14 - 13 कितना होता है? 1 क्वेश्चन सेम था? नहीं। आंसर? 1। [13:47] तो अर्जुन ने जो प्रश्न किए हैं, भगवान ने जो गीता में पढ़ाया था, वह एटरनल (शाश्वत) है। 16 प्रश्नों के अंदर आप कोई ऐसा प्रश्न कर ही नहीं सकते जिसका भगवान ने गीता में उत्तर न दिया हो। [14:17] जैसे आपने एक क्वेश्चन किया, मैंने आंसर किया। फिर उसके बाद मैंने दो उत्तर और रख दिए, आपने कहा— प्रभु जी, आपको कैसे पता था मेरे मन में यह चल रहा था? क्योंकि मैं समझ जाता हूँ कि मैंने यह आंसर दिया होगा तो इसके मन में यह क्वेश्चन उठा होगा। भगवान से बढ़िया तो और कोई जान नहीं सकता। [14:49] तो नॉलेज इज़ द सेम, फिलॉसफी इज़ द सेम। अर्जुन वाज द बेस्ट स्टूडेंट, तो ही विल पुट अप द बेस्ट क्वेश्चंस। नॉलेज रिमेंस द सेम। [15:21] प्रश्न 3: विनोद मिश्रा जी का प्रश्न (साईं बाबा की पूजा) [15:21] Vinod Mishra: "Hare krishna....kya sai baba ki puja krna uchit hai...mere khyal se wo ek sant the aur hme ijjat krni chiye...na ki puja..plz iska samadhan kren" [15:39] हरे कृष्णा विनोद जी! एक वैष्णव समस्त जीवों की इज्ज़त करता है, चाहे वह संत हो या न हो। एक कृष्ण भक्त चींटी की भी इज्ज़त करता है उसको न मारकर। क्योंकि हर जीव का जीने का अधिकार है (Right to live)। [16:23] साईं बाबा जी क्या हैं, क्या थे— इससे कोई शास्त्रों में चर्चा नहीं है। इसलिए हम उनकी पूजा भी नहीं करते। इज्ज़त हम सबकी करते हैं। वह तो देवी-देवता भी नहीं हैं। [16:40] परंतु भटका जरूर रहे हैं लोगों को भगवान से। संत का काम भटकाना नहीं है, संत का काम है बताना कि भगवान कौन हैं। लोग बोलते हैं "सबका मालिक एक"— अबे है कौन? यह तो बता दे! [17:13] तो यह मूर्ख बना रहे हैं लोग। वह भगवान नहीं हैं। इज्ज़त करना गलत नहीं है, परंतु मंदिर बना के पूजा करना? मंदिर सिर्फ भगवान के बनते हैं, किसी आम के नहीं बना करते। हमारे गुरुदेवों के मंदिर नहीं बनते, समाधियाँ बना करती हैं। मंदिर तो सिर्फ भगवान श्री कृष्ण के हैं। [18:00] हर जगह जो बनी हुई हैं वह समाधियाँ हैं, मंदिर नहीं हैं। उनके नाम पर लोग पैसा कमा रहे हैं। भगवद्गीता पढ़िए 16वाँ अध्याय, भगवान कहते हैं अपनी इंद्रिय तृप्ति करने के लिए असुर लोग किसी को भी कुछ भी करते हैं। [19:13] प्रश्न 4: Anonymous का प्रश्न (समलैंगिकता / समलैंगिक संबंधों पर दृष्टिकोण) [19:13] Anonymous: "Hare krishna prabhu ji, please clear ... Chaitanya mahaprabhu aaye aur chale gye, aise hi bhagvan ka har avatar dharti se chala gya ? Ab jab wo nahi h to phr hum unki pooja kyu krte h, hume sirf bhagvan shrikrishna ki pooja krni chaiye...please tell about jaganath baldev subhadra maiya... Chaitanya mahaprabhu jab aashirvad dete tab kehte 'krishna mate rasto' iska kya mtlbi h ?..." [19:16] पहला— "हर अवतार चला गया" - यह रॉन्ग स्टेटमेंट है। कोई नहीं गया, सब यही हैं। हिरण्यकशिपु के लिए खंभे में भगवान नहीं थे, प्रह्लाद महाराज के लिए थे। विष्णु जी परमात्मा के रूप में कण-कण में विराजमान हैं। भगवान हर जगह, हर समय हैं। [20:24] "जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा मैया के बारे में बताओ" — जगन्नाथ जी स्वयं कृष्ण भगवान हैं, द्वारकाधीश का स्वरूप हैं। बलदेव जी बलराम जी हैं। सुभद्रा मैया साक्षात भगवान की बहन हैं (माया देवी)। [23:11] चैतन्य महाप्रभु आशीर्वाद देते हुए कहते थे— "कृष्णमतिरस्तु"। इसका मतलब है— तुम्हारी मति (मन) कृष्ण में लगे। [23:56] प्रश्न 5: कोपल जी का प्रश्न (समलैंगिकता और धार्मिक आख्यान) [23:56] Kopal: "hare krishna prabhuji, i have a doubt, these days supreme court criminalised gay practises... and here many religions have put forward their ideologies on this, and they say that its justified in hinduism as with the association of vishnu and shivji ayyappa was born... so it gay practises natural, ethical or unethical..." [24:59] The basic fact is this: First of all, you have to understand the goal of human life is to develop love of Krishna and go back home, back to Godhead. All carnal feelings have to be finished. [25:21] If carnal feelings are there, that means there is a big problem in your being called a Hindu. You are Hindu Asura! [25:35] When sex between male and female is restricted only for childbirth, then what do you talk of gay? [25:44] Talking about Vishnu Ji and Shiv Ji... two gays can never produce a child! What people are saying is all nonsense. Sanatana Dharma is so strict on sexual relationships even in marriage—if a person is having sex for not begetting children, it is called illicit sex. [26:31] Ayyappa was born by Shiv Ji and Vishnu Ji... they had sex? This is nonsense! As you go higher into planetary systems, bodies become subtle. In Svarga, birth of children happens through subtle mental thoughts. [27:25] Vishnu Ji and Shiv Ji could create children through their thought process. Minds meet and children are born. Dattatreya Ji was born by Shiv Ji, Vishnu Ji, and Brahma Ji together—they did not copulate! That was a mixed avatar of these three. [28:19] In the creation of Krishna, there is only one Purusha (male)—Lord Sri Krishna. Everyone else is female gender (Shakti/energy). So how can there be two gays when there is only one Shaktiman? This is all nonsense. [30:11] प्रश्न 6: अनमोल जी का प्रश्न (शिर्डी साईं बाबा की पूजा) [30:11] Anmol: "why shirdi sai baba is being worshipped ? He is not even in deva devta i thnk ? Please clear. Hare krishna" [30:17] Anmol Prabhu, you are absolutely right! Why is he being worshipped? God/Krishna has given us independence, and people misuse independence to worship anyone. [30:38] You are right, he is not even a Devi-Devta. You don't have to get any clarification, you are already right. These prevalent wrong thoughts should be cleared. Thank you very much!