"जन्माष्टमी के दिन इस नाम का जाप कर लिया तो सभी पापा से मुक्ति मिल जाएगी" by Premanand ji
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00:00:00 भगवान का प्राकट्य उत्सव तभी सार्थक होता है जब वे हमारे हृदय और प्रत्येक श्वास में बस जाएं, क्योंकि वे भक्तों को सुख देने और पापियों का विनाश करने के लिए ही अवतार लेते हैं। 00:01:40 देवकी और वसुदेव के विवाह उपरांत विदाई के समय आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा, जिससे भयभीत होकर कंस ने दोनों को बंदी बना लिया। 00:03:07 भगवान ने योगमाया को आदेश देकर अपने सातवें अंश शेषनाग (बलराम जी) के गर्भ को देवकी के उदर से गोकुल में रोहिणी जी के उदर में स्थानांतरित करवाया। 00:04:40 भाद्रपद मास की अर्धरात्रि रोहिणी नक्षत्र में भगवान ने चतुर्भुज रूप में देवकी और वसुदेव के समक्ष प्रकट होकर अपने पूर्व जन्मों के वचनों का स्मरण कराया। 00:07:11 प्रभु की आज्ञा मिलते ही कारागार के ताले टूट गए, सभी बेड़ियां स्वतः कट गईं, पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए और वसुदेव जी बाल रूप कृष्ण को लेकर गोकुल की ओर निकल पड़े। 00:08:09 मूसलाधार वर्षा के बीच यमुना जी ने उफान लेकर जैसे ही प्रभु के श्रीचरणों का स्पर्श किया, वे तुरंत शांत हो गईं और वसुदेव जी ने गोकुल पहुँचकर बालक को यशोदा जी के पास सुरक्षित पहुँचा दिया। -------
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00:00:00 यह करुणा करके समस्त जीवों को परमानंद प्रदान करने के लिए ही प्रकट हुए और यह प्राकट्य उत्सव सार्थक तभी 00:00:09 हो जब हमारे हृदय में प्रकट हो मेरे मन में मेरे प्राणों में एक एक शवास में एक एक नस 00:00:18 नाड़ी कृष्ण कृष्ण कृष्ण भगवत स्वरूप हो जाए हमारे हृदय में प्रभु का अवतार हो हमारे हृदय में भय प्रगट 00:00:30 कृपाला दीन दयाला #fq देवकी वसुदेव जी ने महान तप किया संसार का स्वामी भगवान मेरा पुत्र बने नंद यशोदा जी 00:00:40 ये सब महान तप संपन्न इनको सुख प्रदान करने के लिए भगवान प्रकट हुए ये दुराचार्यों का विनाश तो बहुत 00:00:48 साधारण सी बात है श्री सुखदेव जी कहते हैं कि उस समय की बात है जब लाखों राक्षसों ने असुरों 00:00:58 ने दैत्यों ने राजाओं का रूप धारण करके पृथ्वी में आतंक मचा रखा था अहंकार से भरे हुए बल से 00:01:07 भरे हुए पृथ्वी को आकांत कर रखा था आक्रांत पृथ्वी त्राण (रक्षा) पाने के लिए रो रही थी यह उस समय 00:01:17 की बात है जब यदुवंशी राजा शूरसेन मथुरा मंडल सुरसेन मंडल का मथुरा पुरी में रहकर के शासन करते थे 00:01:30 ये मथुरा समस्त यदुवंशी नरपतियों की राजधानी थी मथुरा में सदैव भगवान की उपस्थिति पाई गई है मथुरा में सूर्य 00:01:40 के पुत्र वसुदेव जी का विवाह देवकी जी के साथ हुआ ये उस समय की बात है जब नव विवाहिता 00:01:50 पत्नी देवकी को रथ पर विराजमान करके वासुदेव जी ले जा रहे थे कंस बड़ा बलवान स्वभाव में धूर्तता वसुदेव 00:02:04 जी से कहा मैं रथ हाकूंगा मेरी बहन है और रथ के घोड़ों की लगाम पकड़ ली स्वयं रथ हाकने 00:02:14 लगा रथ चल पड़ा जिस समय घोड़ों की लगाम पकड़ कर कंस रथ हांक रहा था ok उसी समय स्पष्ट आकाशवाणी 00:02:22 हुई अरे मूर्ख जिसको तू रथ में बैठा कर लिए जा रहा है उसकी आठवें गर्भ की संतान तुझे 00:02:31 मार डालेगी भोज वंश का कलंक आकाशवाणी सुनते ही कूद पड़ा रथ से तलवार खींच ली और बाल पकड़े देवकी 00:02:41 के अनंत महिमा अनंत बलशाली भगवान शेष जी पधारे देवकी जी के गर्भ में अनंत भगवान जब सातवें गर्भ के 00:02:51 रूप में देवकी के उदर में पधारे बड़ा आनंद पर देवकी जी को लगा कि कंस इसे भी मार डालेगा 00:02:59 इसलिए रुदन करने लगी विश्वात्मा भगवान ने देखा कि माता को बहुत दुख है और यदुवंशियों को कंस सताए 00:03:07 ही जा रहा है तो अपनी योग माया का स्मरण किया और योग माया को आदेश किया देवी कल्याणी तुम 00:03:15 ब्रज में जाओ वह प्रदेश ग्वालों और गौओं से सुशोभित है वहां नंद बाबा के गोकुल में वसुदेव जी की 00:03:21 पत्नी रोहिणी गुप्त रूप से निवास कर रही उनकी और भी पत्नियां कंस के डर से गुप्त स्थानों में रह 00:03:27 रही हैं इस समय मेरा महान अंश जिसे अनंत शेष जी कहते हैं देवकी के उदर में गर्भ रूप से विराजमान 00:03:35 है तुम जाओ वहां से उस गर्भ को रोहिणी के उदर में रखो मैं स्वयं आ रहा हूं अब विलंब 00:03:40 सहा नहीं जा रहा अब मैं समस्त ज्ञान बल अंशो के साथ देवकी का पुत्र बनूंगा और नंद बाबा की पत्नी 00:03:47 यशोदा के गर्भ से तुम प्रकट हो योग माया को आदेश किया जब योग माया ने देवकी का गर्भ ले 00:03:53 जाकर रोहिणी के उदर में रख दिया तब समस्त द्वारपाल और सब जगह खबर पहुंच गई गर्भ नष्ट हो गया 00:03:59 देवकी किसी को आंतरिक पता तो है नहीं नगरवासी बहुत बेचारी के छह तो मार डाले गए और सातवां गर्भ 00:04:07 नष्ट हो गया हाय कितना कष्ट देवकी को है देवकी जी भगवान का निवास स्थान बन गई परीक्षित अब समस्त 00:04:16 शुभ गुणों से युक्त बहुत सुहावना समय आया रोहिणी नक्षत्र था आकाश के सभी नक्षत्र ग्रह और तारे सौम्य हो रहे थे 00:04:27 अब तो काले-काले मेघ आकर मंडराने लगे 00:04:33 और धीरे-धीरे गर्जना करते हैं भारी वर्षा प्रारंभ 00:04:40 जन्म मृत्यु के चक्र से छुड़ाने वाले जनर्धान भगवान का अवतार समय निशचित रात के 12:00 बजे 00:04:49 उसी समय सबके हृदय में विराजमान भगवान देवरूपिणी देवकी के सामने प्रकट हुए 00:04:56 श्री भगवान ने कहा देवी स्वायंभुव मन्वंतर में जब तुम्हारा पहला जन्म हुआ था उस समय तुम्हारा नाम था पृश्नि 00:05:04 जैसा मैं आज तुम्हारे सामने प्रकट हुआ हूं ऐसा उस समय भी प्रकट हुआ था और तुमसे कहा वरदान मांगो 00:05:10 तब तुम दोनों ने कहा आप जैसा पुत्र मुझे चाहिए तो 00:05:15 मेरे जैसा तो सिर्फ मैं ही हूं 00:05:21 तो मेरे जैसा पुत्र तो मैंने यह वरदान दिया कि मैं ही स्वयं तुम्हारा पुत्र बनकर आऊंगा यह छोटी-मोटी तपस्या का फल नहीं है आप देख लीजिए 00:05:30 अगर आप जीवन भर राम कृष्ण हरि भगवत नाम जपते हुए भगवत प्राप्त हो जाते हैं तो कितना सरल है 00:05:35 कितना सरल है इसलिए धन्य है यह कलयुग जो कम समय में भगवत प्राप्ति केवल भगवत नाम जप और थोड़ा सा केवल पापाचरण से अपने को बचा लो तो भगवत प्राप्ति हो जाएगी 00:05:47 हे माता जी मैंने देखा कि संसार में शील स्वभाव उदारता अन्य गुणों में मेरे जैसा कोई नहीं इसलिए मैं ही तुम्हारा पुत्र हुआ, मैं ही 00:05:59 पृश्निगर्भ से वामन रूप से और इस समय तुम देवकी वसुदेव हुए 00:06:07 वासुदेव के रूप से एक बार मैं वचन बोलता हूं उसे तीन बार पूरा करता हूं 00:06:13 यह भगवान का नियम मेरी वाणी त्रिकाल सत्य है एक बार तुमने मांगा पुत्र तो पृश्निगर्भ वामन रूप और इस समय वासुदेव रूप 00:06:23 कश्यप अदिति के रूप में वामन रूप 00:06:28 और मैंने यह रूप इसलिए प्रकट किया कि जब मैं अवतार लेकर मनुष्य शरीर में लीला करूंगा तो मुझे पहचान पाना बड़ा बहुत कठिन है 00:06:34 इसलिए तुम लोग ध्यान रखना मैं कौन हूं यह खास बात 00:06:38 यह खास बात ध्यान देने योग्य बात है भगवान कह रहे हैं कि तुम दोनों मेरे प्रति पुत्र भाव और निरंतर ब्रह्म भाव रखना 00:06:45 युवां मां पुत्रभावेन ब्रह्मभावेन चासकृत् चिन्तयन्तौ कृतस्नेहौ यास्येथे मद्गतिं पराम् तब तुम मेरे परम पद को प्राप्त होगी 00:06:54 चिंतन कौन हैं गोपाल जी कौन हैं लाल जी कह रहे तुम मेरे प्रति पुत्र भाव और निरंतर ब्रह्म भाव 00:07:02 इस प्रकार के चिंतन द्वारा तुम मेरे पद को मेरे प्रिया प्रीतम हैं कौन भगवान की आज्ञा का पालन करने के लिए ज्यों ही चेष्टा की ध्यान दीजिए 00:07:11 भगवान की आज्ञा का पालन करने के लिए ज्यों ही चेष्टा की तो अपने आप हथकड़ी बेड़ियां कट गई 00:07:16 माया की हथकड़ी बेड़ियां कट जाएंगी ज्यों ही भगवान की आज्ञा का पालन कर और बड़े-बड़े दरवाजे कोई एक दो नहीं थे कई दरवाजे थे कंस के कारागार के 00:07:26 फटाफट सब ताले टूट गए दरवाजे खुल गए अद्भुत चमत्कार और जितने पहरेदार घोर राक्षसी स्वभाव के जिंदा खा जाएं ऐसे पहरेदार थे सब मूर्छित घोर निद्रा में 00:07:38 अब हथकड़ी बेड़ी कट गई लाला को 00:07:43 लेकर के चले 00:07:46 उस समय घोर बादल छाए हुए 00:07:51 यमुना जी ने देखा कि प्रभु पधार रहे हैं तो पहला चरणामृत तो हमारा ही अधिकार बनता है 00:07:57 अरे जिनके चरणों का ध्यान बड़े-बड़े महापुरुष शिव आदि करते हैं आज वही प्रभु मेरे पास आ रहे हैं आनंद में भर गई यमुना जी और उफान 00:08:09 यमुना जी ने जब उफान आनंद का लिया तो वसुदेव जी के प्राण बहुत घबरा रहे हैं कि अब क्या करें लौट सकते नहीं कोई नौका आदि है नहीं 00:08:18 चलो प्रभु ने आज्ञा करी है तो वही देखेंगे अब मेरे प्राण चाहे चले जाएं मेरे लाला को कुछ न हो ऐसे यमुना जी उफान कर रही कि चरण छू ले और वसुदेव जी उल्टा सोच रहे कि यमुना जी बढ़ रही तो लाला को बचाएं 00:08:32 देखो यह समर्पण है मेरे प्राण भले चले जाएं बस आज्ञा का पालन प्रभु को पहुंचाना है और सुरक्षित पहुंचाना है 00:08:42 यमुना जी ऐसे थपेड़े जोर-जोर से बढ़ रही 00:08:48 भगवान ने कहा बाबा तो और ऊपर उठाते चले जा रहे हैं तो यमुना जी और बढ़ती चली जाएंगी 00:08:56 एक श्री चरण यह वसुदेव जी को पता नहीं ज्यों ही यमुना जी को श्री चरण प्रभु के स्पर्श हुए तो 00:09:04 तुरंत नाभि भर हो गई और ऐसे एकदम शांत 00:09:10 वसुदेव जी बाबा के नगर में गोकुल में गए तो डर रहे थे कि कोई देख न ले लेकिन वहां कोई देखने वाला था ही नहीं सब सोए हुए थे 00:09:19 उन्होंने अपने पुत्र अब वह ऐसे देख रहे ऐसे और जहां सुलाया तो वहां भी पुत्र था 00:09:26 पार्श्व में योगमाया और वही पुत्र भगवान के इस अवतार में दो अवतार हुए 00:09:31 एक हुआ चतुर्भुज नारायण भगवान का अवतार जो वसुदेव देवकी के सामने और एक हुआ पीछे आपने सुना है नंद 00:09:40 बाबा और यशोदा मैया बहुत ऐश्वर्य समृद्धि सब रिद्धियां सिद्धियां अठखेलियां कर रही ब्रज तो 00:09:50 यहां रिद्धियां सिद्धियां अठखेलियां कर रही कौन पूछता है अवस्था ढल गई थी नंद बाबा की चौथापन था 00:10:01 और ब्रजवासी बाबा की इस दशा को देखकर सह नहीं पा रहे थे बाबा खिन्न रहते थे 00:10:09 उपनंद आदि वृद्ध गोपों ने परामर्श करके पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन किया सबने यज्ञ पुरुष गोपराज नंद को पुत्र प्रदान करने की 00:10:17 प्रार्थना की भगवान से पुत्रेष्टि यज्ञ हुआ जैसे महाराज दशरथ जी की अवस्था ढल चुकी थी तो श्रृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया उससे खीर फिर 00:10:27 भगवान चारों रूपों में प्रकट हुए राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न पुत्रेष्टि यज्ञ का अनुष्ठान हुआ नंद बाबा के यहां अब उच्च कोटि के ब्रह्मऋषि वेद ध्वनि आकाश में मुखरित हो रही थी 00:10:41 गोपराज ऋषि नंद बाबा अंतःपुर में यशोदा मैया के पास बैठे हुए कहा यशोदा रानी इस बार पूरे ब्रजवासियों का आशीर्वाद है और सब ब्रह्मऋषि हैं कई बार हो चुके इसका मतलब पुत्र के लिए कई बार उपाय किए जा चुके थे 00:10:55 इस बार फल स्वरूप में मेरे पुत्र होगा